
पूरे विश्व में ऐसे बहुत सारे भूमि खंड और भवन है जिनके स्वामित्व के अधिकार के लिए कई पंथों और धर्मों में हिंसात्मक युद्ध होते ही रहते हैं । 2000 वर्ष पहले ईसाई पंथ का उदय हुआ और 1400 वर्ष पहले इस्लाम पंथ अस्तित्व में आया । यहूदी धर्म इन दोनो पंथों से थोड़ा पहले उदय हुआ था । यह तीनों पंथ एब्राहिमिनिक धर्मों के नाम से जाने जाते हैं और इनके पवित्र स्थानों जो की कॉमन हैं उस पर नियंत्रण के लियो तीनों पंथों में भयंकर हिंसा और खून खराबा होता रहा है । इसमें एक स्थान अलअक्सा मस्जिद जो की इजरायल के जेरूसलम में स्थित है उस पर नियंत्रण के लिए कई ऐतिहासिक युद्ध पिछले 2000 वर्षों में हुए हैं और आजकल के मिडिल ईस्ट महायुद्ध में इसी के नियंत्रण के लिए भयंकर हिंसा हो रही है । हो सकता है की यह विश्व युद्ध में बदल जाए और करोड़ों जीवात्माओं की इसमें जान चली जाए । धार्मिक स्थलों पर कलह बहुत हिंसात्मक होती है और इसका राष्ट्रीय कानून या इंटरनेशनल कानून के द्वारा कोई समाधान नहीं होता ।
भारत के भी अत्यंत पवित्र सनातन धर्म के अत्यंत प्राचीन स्थलों को जंगली शासकों के द्वारा जानबूझ कर तोड़ा गया और उन पर दूसरे धर्म के स्थलों का निर्माण करा दिया गया । रामजनमभूमि अयोध्या कम से कम 8 लाख वर्ष पुराना स्थान है और इसपर हमेशा मंदिरों के भवन विद्यमान रहे हैं । पर आज से लगभग 500 वर्ष पहिले बाबर के शासन काल में 1526 में इसको तोड़ दिया गया । इस स्थान की मुक्ति के लिए लाखों लोगों ने अपना जीवन बलिदान किया । पर 1980/1990 के दशक में एजलेस महायोगी ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबाजी ने संकल्प किया की इस पवित्र स्थान की मुक्ति पूर्णतया शांतिपूर्ण तरीके से सारे धर्मों की सर्वसम्मति से और कानून के द्वारा होगी । बाबाजी ने इसकी सार्वजनिक घोषणा अपने पूरे आशीर्वाद के साथ 1989 के अपने विश्व हिंदू परिषद के मंच से प्रयागराज के महाकुंभ में करी थी और उन्होंने कहा था की यह सारी भूमि भगवान राम की है और उन्हीं की होकर रहेगी । बाबाजी ने स्पष्ट बताया था की सारे धर्मों के अनुयायियों पर उनका पूर्ण आशीर्वाद और दया है और इसकी मुक्ति पर्व पर एक भी रक्त की बूंद नहीं बहेगी । बाबाजी के स्थूल शरीर 1990 में त्यागने के पश्चात विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं ने बाबाजी के अंतरंग स्वरूप और उनके आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और अपने आप में ही एक महानतम त्रिकालदर्शी महायोगी ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबाजी से अनेकों बार पूछा की ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबाजी की घोषणा के बाबजूद राम मंदिर क्यों नहीं बन पाया । तब देवरहा हंस बाबाजी ने उन्हें हर बार बताया की उनके सदगुरुदेव का वचन और घोषणा अटल सत्य है और यह अवश्य ही होगा । ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी की रामजनंभूमि विषयक परावाणी जो की चौरासी दोहों में वर्णित की गई है , इस पवित्रतम स्थल की मुक्ति का एक एक्शन प्लान और स्क्रिप्ट रही है । देवरहा तत्व इस स्थान की शांतिपूर्वक मुक्ति का मूल आध्यात्मिक वास्तुकार है । बाबाजी के संकल्प और घोषणा के लगभग 35 बर्ष बाद मुक्ति का संकल्प फलीभूत हुआ और 2020 में कानून ( सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ) के अनुसार राम जन्मभूमि सर्वसम्मति से शांतिपूर्वक तरीके से मुक्त हुई । आजकल के हिंसात्मक वातावरण में प्रेम और शांति से इतनी जटिल समस्या का समाधान महान आध्यात्मिक त्रिकालदर्शी महायोगियों के आध्यात्मिक हस्तक्षेप के द्वारा ही संभव है । यह आध्यात्मिक शक्ति विशेषकर भारत की तपोभूमि में ही क्रियाशील रहती हैं ।
अगर ऊपर वर्णित दोनो स्थानों के वर्तमान इतिहास की तुलना की जाए तो महायोगियो के अखंड भारत के निर्माण में योगदान को बड़ी सरलता से समझा जा सकता है ।
ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी के लिए यह एक अपार हर्ष का विषय है । उनके सदगुरुदेव का संकल्प और बाबाजी का अपना संकल्प दोनों महावीर हनुमान जी के द्वारा फलीभूत कराए गए हैं । अपने अपार हर्ष और महावीर हनुमान जी और भगवान राम के प्रति अपनी कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए बाबाजी के द्वारा 551 मन का देसी घी के लड्डुओं का भोग भगवान रामलला को अर्पित करना है और यह महाप्रसाद अयोध्या के समस्त मंदिरों और आश्रमों में और देश के महत्वपूर्ण स्थानों में 22 जनवरी 2024 को और उसके बाद बंटवाया जायेगा ।


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