नकली धन को असली धन में परिवर्तित करने का एकमात्र उपाय _ गौसेवा _ श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन से लेकर कृष्णजन्माष्टमी तक का संकल्पबाबाजी इस संसार के सबसे अधिक धनवान ईश्वरस्वरूप हैं ।

असली धन क्या होता है ? असली धन उसी को माना जा सकता है जो अमर होता है । वास्तविक धन वही है जो आत्मा की कई जन्मों की यात्रा में हमेशा उसके साथ चलता है । गौ सेवा के द्वारा कमाए हुए पुण्य और राम नाम का धन , जीवात्मा के साथ हमेशा चलता है और शरीर का अंत हो जाने के पश्चात भी उसका नाश नहीं होता और उसके स्वामित्व के अधिकार में भी कोई परिवर्तन नहीं होता । असली धन का दूसरा मापदंड यह है कि वास्तविक धन के स्वामी होने से होने से स्वामी को इसके खोने या चोरी होने का कोई भय नहीं होता और यह परमसुख का कारण बनता है । बाबाजी ने अनेकों बार बताया है कि वह धन जिस का स्वरूप बदल जाए या जो आपके साथ में ना चले वह वास्तविक धन नहीं होता और उसकी यूटिलिटी केवल भौतिक जगत में , जब तक शरीर होता है , तभी तक होती है । पर शरीर के साथ में चलते हुए भी अगर वह बहुत अधिक मात्रा में है और जिस में से देवांश निकाल कर दान नहीं किया गया है , तो यह धन बहुत बड़े दुख का कारण बनता है । , दिल्ली की एक राजनेतिक पार्टी के कई नेता भ्रष्ट आचरण से धन कमाने के आरोपों से घिर कर जेल में अपना समय काट रहे हैं और अपने आप को और जनता को दुख में डाल रहे हैं । ऐसे धन का क्या लाभ ? इसी तरह उत्तर प्रदेश में दो शराब के व्यापारी भाइयों ने कुछ वर्ष पहिले , एक छोटे से धन के ऊपर विवाद को लेकर , एक दूसरे की गोली मारकर हत्या कर दी थी । वही धन जिसके पीछे दुनिया भाग रही है वह इन भाइयों की मृत्यु का कारण बना । इसी प्रकार से कुछ वर्ष पूर्व प्रयागराज में एक प्रसिद्ध मंदिर के महंत की हत्या या आत्महत्या उनके यहां जरूरत से अधिक धन होने के कारण ही हुई । जरूरत से अधिक धन बहुत भारी समस्याओं का कारण बन जाता है और न्यायपालिका में मुकदमे करवाता है घर की शांति को भंग करवाता है और कभी-कभी बहुत भीषण रूप ले कर एक दूसरे के साथ में हिंसा और मृत्यु का कारण भी बन जाता है । धन की जरूरत को सभी जानते हैं और धन का एक सीमित मात्रा में होना आवश्यक भी है । पर आवश्यकता से बहुत अधिक धन होने पर इस धन को या इसके एक अंश ( विष्णु अंश ) को गौ सेवा और संत सेवा में लगाने से यही धन जो विनाश का कारण बनता है वही धन घर और परिवार में सुख शांति लेकर आता है । जरूरत से अधिक धन को पाप का रूप माना गया है और इसीलिए धन का शुद्धिकरण होना बहुत आवश्यक है । धन के शुद्धिकरण से अंतर्मन और शरीर का भी शुद्धिकरण होता है । यह शुद्धिकरण केवल गौ सेवा के द्वारा ही किया जा सकता है , मानव सेवा भी एक रास्ता है पर गऊ सेवा सर्वोपरि और सर्वोत्तम है क्योंकि इसके द्वारा भगवान की सहज प्राप्ति भी संभव हो जाती है । बाबाजी यह हमेशा बताते हैं कि जिस धन का रूप और स्वामित्व बदल जाए , वह सच्चा धन नहीं है , बल्कि बहुत बड़े बंधन का कारण होता है । सोना चांदी हीरा रुपया डॉलर आदि धन के सभी रूप परिवर्तनशील है , जहां पर स्वामित्व का अधिकार बदल जाता है या धन का ही स्वरूप बदल जाता है इसलिए इसको स्थाई धन कभी भी नहीं माना जा सकता । जो जीवन में पुण्य कमाए गए हैं केवल वही आपके साथ हमेशा रहते हैं और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता और यही सच्चा धन है । आत्मा की कई शरीरों में यात्रा के दौरान या मोक्ष प्राप्त करने के बाद भी यह सनातन धन पूंजी जीवात्मा के साथ ही रहती है । पतंजलि के अष्ट योग सिद्धांत में जरूरत से अधिक धन के संग्रह को उचित नहीं माना गया है । इस सिद्धांत _ अपरिग्रह _ को सच्चे योगी हमेशा अपने जीवन में उतारते हैं और इसके बारे में दूसरों को उपदेश भी करते हैं । सच्चे संत वो ही होते हैं जो दान के धन को सारा गौसेवा के लिए व्यय करते हैं और कभी भी भविष्य के लिए संचय नहीं करते हैं । बाबाजी कहते हैं की वोह दुनिया और ब्रह्मांड के सबसे धनी व्यक्ति हैं क्योंकि उनके पास आध्यात्मिक धन की बहुत बड़ी अनंत संपत्ति है और नकली भौतिक धन को भी केवल आवश्यकताओं के अनुसार ही परमार्थ के लिए प्रयोग किया जाता है ।
आज कृष्ण जन्माष्टमी से कुछ दिन पहले और रक्षा बंधन की श्रावण पूर्णिमा पर सतत गौसेवा का संकल्प करना और उसके बाद उस संकल्प को सिद्ध करना या वास्तविक रूप देना , एक सबसे उपयोगी और महत्वपूर्ण संकल्प होगा । सभी से यह प्रार्थना है कि अपने ही स्वार्थ सिद्ध करने के लिए और जीवन के चारों लक्ष्य _ धन काम अर्थ और मोक्ष , को प्राप्त करने के लिए आज ही इस संकल्प को सत्यता पूर्वक ले और अपने धन के एक अंश को , गौ सेवा में आज से लेकर जन्माष्टमी तक तुरंत प्रवाहित करें । इससे तन मन और धन तीनों का शुद्धिकरण होगा और आपका पूरा जीवन शांति और समृद्धि से भरा रहेगा ।

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