गौसेवा के लिए किया गया परम कल्याणकारी सात्विक दान का स्वर्णिम अवसर

मानव जीवन के लिए परम हितकारी गौ सेवा के निम्नलिखित लाभ जानना आवश्यक और हितकारी है।
१ गौ सेवा के द्वारा अखंड भारत का निर्माण ।
२ गौ सेवा के द्वारा पुण्यों को अर्जित करना और उनका संचय करना ।
३ गौ सेवा के द्वारा अपने पापों को नष्ट करना और उनको पुण्य में परिवर्तित करना।
४ गौ सेवा के द्वारा जीवन के चार पुरुषार्थ _ धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष को प्राप्त करना
५ गौ सेवा के द्वारा अपने पितरों को शांति और मुक्ति दिलवाना
६ गौसेवा के द्वारा अपने आगे आने वाली पीढ़ियों का कल्याण करवाना
७ गौसेवा के द्वारा सनातन धर्म को विश्व व्यापी बनाना ।

ब्रह्म ऋषि श्री देवराहा बाबा जी ने अनेकों बार बताया था कि भारत में जब तक गोवध बंद नहीं होगा और गौ सेवा पूरे विश्वास और श्रद्धा से नहीं की जाएगी , तब तक भारत में शांति और समृद्धि की कमी रहेगी । ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबा जी के अंतरंग स्वरूप ब्रह्म बेता श्री देवराहा हंस बाबा जी ने अनेकों बार बताया है की गौ की उत्पत्ति भगवान कृष्ण के शरीर से ही हुई है और गौ और गोपाल में कोई भेद नहीं है । वास्तव में गौ की सेवा ही गोपाल की सेवा है । गौ सेवा अपने पापों को पुण्य में बदलने का एक मात्र सर्वोत्तम साधन है । ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी की गौशाला में संख्या 1990 में 150 थी , जो अब बढ़कर 3000 तक हो गई है , और इसमें अभी बहुत संवर्धन होना है ।

गौ सेवा के द्वारा ही बाबा जी ने आत्मज्ञान प्राप्त किया , प्रकृति के पांचों तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त किया और भगवान राधा कृष्ण जी के साथ में पूर्ण एकीकरण को प्राप्त किया है और वह इस वर्तमान समय में विश्व के महानतम महायोगी है । बाबाजी के निर्देशन में ही गोपालन और गौ सेवा आश्रम में किया जाता है । एक गौ के लिए 1 दिन में 10 से 15 किलो भूसे की आवश्यकता होती है । मार्च में जब गेहूं की फसल कटती है तभी भूसे का उत्पादन होता है और मार्च अप्रैल में भूसे के दाम साल में सबसे कम होते हैं । साल भर का भूसा खरीदने के लिए लगभग 5 करोड रुपए की आवश्यकता होती है । बाबाजी के सिद्धांतों के अनुसार यह सारा गौ के भोजन प्रसाद का प्रबंधन दान के द्वारा प्रवाहित राशि से पूरा किया जाता है , सरकारों से कोई सहायता नहीं ली जाती और गौ के किसी भी उत्पाद को बेचकर कोई आय नहीं बनाई जाती है ।

गौशाला पूर्णतया गैर व्यावसायिक रूप में चलती है । गाय के हरे चारे को अपनी भूमियों में ही उत्पन्न किया जाता है और उसको विंध्याचल की गौशाला के लिए बाहर से नहीं खरीदा जाता है । वृंदावन की गौशाला मैं डेढ़ सौ गौवंश हैं और उनके लिए हरा चारा और भूसा दोनों बाजार से क्रय किए जाते हैं । गौ के भोजन को इसी समय आश्रम के भंडारगृह में रखना होता है । यह सबसे बड़ा अन्न दान है और इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर परम भाग्यशाली लोगों को ही मिलता है । इस वर्ष भूसा खरीदने के लिए लगभग ₹50000000 की आवश्यकता होगी जिसको मार्च के महीने में जमा करके पूरे भूसे को मार्च तक या अधिक से अधिक 15 अप्रैल तक खरीद लेना होगा, क्योंकि इसी वक्त भूसा कम दाम में और अधिक मात्रा में उपलब्ध हो जाता है ।


भूसे को किसान और व्यापारी ट्रैक्टर ट्रॉली में ही अधिकतर आश्रम में ले कर आते हैं । भूसे को आश्रम के अपने धर्म कांटे में तोलकर भूसा भंडार में गिरवाने के बाद ही तुरंत भुगतान करना होता है । एक ट्रॉली की लागत लगभग ३०००० रुपए होती है । इस वर्ष लगभग १५०० ट्रॉली भूसा खरीदने की आवश्यकता है। बाबा जी के शिष्य जोकि पूरे भारत और विश्व में फैले हुए हैं उनसे अपेक्षा और प्रार्थना की जाती है कि वह कम से कम एक ट्रॉली और अधिक से अधिक अपनी क्षमता के अनुसार राशि को दान के रुप में बाबाजी के निम्नलिखित ट्रस्ट अकाउंट में भेज कर लाभान्वित हों । बाबाजी के वचन को मैं पुनः दोहराता हूं कि यह सारी व्यवस्था जीवात्माओं के कल्याण के लिए ही भगवान कृष्ण के द्वारा बनाई गई हैं । यह सभी के लिए है और भारत और विश्व के सभी नागरिक जिन्होंने बाबाजी के दर्शन नहीं किए हैं वो भी इसमें दान करके अवश्य पुण्य कमा सकते हैं ।

बाबाजी के शिष्यों का यह दायित्व है की वह अपने मिलने जुलने वाले लोगों को इसकी सूचना देकर उन्हें दान करने की प्रेरणा करके उनका कल्याण करवाएं ।अपनी आय का दशांश जो की विष्णु अंश होता है उसको अपनी व्यक्तिगत व्यवस्था में कभी भी व्यय / संचय न करके गौसेवा में प्रवाहित कर देना चहिए । महायोगियों की गौशाला में की हुई सेवा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण गृहशांति का उपाय होता है ।
दान राशि निम्नलिखित खातों में अधिक से अधिक और शीघ्र से शीघ्र प्रवाहित करने का कष्ट करें और इसकी सूचना व्हाट्सएप ( 9999535099 ) पर देने की कृपा करें । दान दी गई राशि पर भारतीय इनकम टैक्स के 80G सेक्शन के अनुसार 50 percent छूट भी प्राप्त है ।

BRAHMVETTA SHRI DEVARAHA HANS BABA TRUST
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