
भारत के इतिहास में ऐसे अनेकों उदाहरण है जहां पर राजा रानियों को और अन्य गृहस्थों को विवाह के बहुत अधिक समय के पश्चात महान संतों के आशीर्वाद से पुत्र या पुत्री रतन की प्राप्ति हुई। हमारे सदगुरुदेव ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के आशीर्वाद से कई दंपतियों को पुत्र या पुत्री की प्राप्ति विवाह के अनेकों वर्ष उपरांत
हुई । उत्तर प्रदेश के एक जाने-माने भूतपूर्व राजकीय परिवार की वर्तमान वारिस को विवाह के 11 वर्ष उपरांत एक-एक करके दो पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई । एक भारत सरकार में कार्यरत सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर के लड़के को विवाह के अनेकों वर्ष उपरांत बाबा के आशीर्वाद स्वरुप एक पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई । बिहार के एक भूतपूर्व राजकीय परिवार में बाबाजी के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई । झारखंड के एक इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर को बाबाजी के आशीर्वाद के फलस्वरूप दो बच्चे प्राप्त हुए । हैदराबाद के एक ब्राह्मण परिवार में उनकी पुत्री को पुत्ररतन की प्राप्ति बाबाजी के आशीर्वाद से विवाह के दस बारह वर्ष के उपरांत हुई । बिहार झारखंड के एक आई ए एस अधिकारी को विवाह के कई वर्षों बाद बाबाजी के आशीर्वाद से संतान प्राप्त हुई । ऐसे अनेकों उदाहरण हैं । बाबाजी स्वयं बताते हैं की उनको भगवान कृष्ण की प्राप्ति अपने परमपूज्य सदगुरुदेव ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबाजी के आदेशानुसार गौमाता की निरंतर और निस्वार्थ सेवा और निष्ठा के द्वारा प्राप्त हुई ।
बहुत से लोग जो की संतानरहित हैं , और जो बाबाजी के द्वारा आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा प्रगट हुई संतानों के बारे में जानते हैं , हम लोगों को बाबाजी के आशीर्वाद के द्वारा संतान प्राप्ति के लिए संपर्क करते हैं । ऐसे ही एक बिहार के साहिब ने मुझे इस बारे में संपर्क किया तो मैंने उनको बाबाजी की आध्यात्मिक शक्तियों के बारे में सूचित किया तो यह भाई साहिब इस पर कई सवाल जवाब करते रहें तो मैंने इनको कहा कि आपके जो भी गुरु हैं आप उनकी शरण में जाइए । कुछ समय पश्चात इन्होंने दोबारा संपर्क किया तो मैंने इन्हें गौसेवा करने के लिए कहा क्योंकि इनकी मनोवृति एक मनुष्य को भगवत स्वरूप सदगुरुदेव मानने की थी ही नहीं । पर यह लोग गाय को भी पशु मानते हैं और गौ और गुरु की आध्यात्मिक शक्तियों को स्वीकार करने में मानसिक रूप से असमर्थ हैं । इस कारण से यह भाई साहिब डॉक्टरों के चक्कर काट रहें हैं । इस संदर्भ में यह जानना आवश्यक है कि प्राचीन भारत में एक बहुत महान राजा दिलीप जिनके संबंध स्वर्ग के राजा इंद्र से भी थे , वोह अपने प्रताप से संतान की प्राप्ति नहीं कर पाए थे पर जब उनको गौमाता की सेवा करने के लिए कहा गया तो उन्होंने अपने प्राणों की बाजी भी लगाकर नंदिनी गौमाता की निस्वार्थ सेवा करी और नंदिनी गौमाता की कृपा से उनको एक पराक्रमी पुत्र की प्राप्ति हुई । भौतिक जगत के उपाय तो करने ही चाहिए पर गौमाता की सेवा करके उनकी आध्यात्मिक कृपा को प्राप्त करने में कोई परेशानी तो नहीं है । ऐसे लोग अपनी मंद बुद्धि और अहंकार के कारण अपने स्वार्थ को भी नहीं सिद्ध कर पाते । बहुत से लोग अपनी इच्छा की पूर्ति के बाद अपने कृतघ्न गुणों के कारण गुरुओं और गौमाता के उपकारों को जल्दी ही भूल कर बहुत बड़ा पाप कमातें हैं ।



