
भगवान का बोध होना मानव जीवन में दुखों को हटाकर सुखों को लाने का एकमात्र उपाय है । भगवान का कैसे बोध हो और किस प्रकार से मनुष्यों को देह बोध रहते हुए कृष्ण बोध ( Krishna Consciousness ) हो जाए और बढ़ती जाए ?

इसके लिए हमारे शास्त्रों में बहुत से प्रसंग आए हैं । यक्ष युधिष्ठिर संवाद जिसका वर्णन महाभारत के वनपर्व में किया गया है , एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रसंग है जिसके द्वारा भगवान के होने का बोध प्राप्त होता है ।

इसमें एक प्रश्न है जिसमें यक्ष पूछते हैं कि प्रतिष्ठा प्राप्त धनियों के लिए कौन सी वस्तु श्रेष्ठ है तो युधिष्ठिर ने उत्तर दिया _ प्रतिष्ठित धनवानों के लिए गौ का पालन पोषण श्रेष्ठ है ।

आजकल धनवान व्यक्ति गौ पालन स्वयं नहीं कर सकते तो उनके लिए यह उचित है की वो महायोगियों की गौशाला जहां गौपालन निस्वार्थ भाव से गैर व्यावसायिक रूप से किया जाता है , ऐसे महान आश्रम में स्तिथ गौशालाओं की निस्वार्थ रूप से सतत सेवा करें ।



