गौसेवा के द्वारा पुण्यों को संचित करें और करवाएं ।कुछ भी दान तुरंत करें और करवाएं ।

मैं फेसबुक पर अपने सभी मित्रों के लिए आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मेरे पिछले ” गौ सेवा के लिए दान के द्वारा कल्याण ” विषय पर लेख को पढ़ा और पसंद किया है।

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मेरे एक मित्र रूपेश जी , अनिल जौहरी जी ने तुरंत ही कुछ राशि भेज दी । यह दोनों ही बाबाजी से दीक्षित नहीं हैं पर श्रद्धा से तुरंत दान किया है । तुरंत दान महा कल्याण । यह बहुत सोचने का या मीमांसा करने का विषय नहीं है । यहां पर यह मुझे कहना है कि दान करने की परंपरा हमारे समाज से लगभग समाप्त हो चुकी है या बहुत नगण्य रह गई है । अगर मानव कल्याण और मानव समाज में शांति की स्थापना करनी है तो सर्वश्रेष्ठ स्थानों में सही समय पर सही मात्रा में किए जाने वाले दान से न केवल व्यक्तिगत लक्ष्यों की वर्तमान बल्कि भविष्य के जीवनों में भी आवश्यकता होती है । हमारे शास्त्रों में धन को कुछ सीमा तक पाप का रूप माना गया है और इसका शुद्धिकरण करने के लिए शास्त्रों में दशांश अंश का दान करने का विधान है। बहुत से लोग यह संदेह करते हैं कि उनके दान की राशि कहीं गलत कार्यों के लिए प्रयोग तो नहीं होगी या उससे उनको क्या व्यक्तिगत लाभ मिलेगा ।

जहां तक दान राशि के उपयोग की बात है मैं अपने अनुभव से पूर्ण विश्वास के साथ में यह कह सकता हूं कि बाबा जी की गौशाला के लिए किया हुआ दान केवल देसी गौ माता की सेवा में ही लगता है और उसका कोई अन्य उपयोग नहीं होता और यह बात बिल्कुल निश्चित है ।

दूसरी बात दान देने से क्या कल्याण होगा इसको समझना और समझाना बहुत मुश्किल कार्य है । तो इसके लिए जो हमारे महान संत कहते हैं उस पर पूर्ण विश्वास करके इस पर अवश्य अमल करना चाहिए । बहुत से लोग इस बात को बहुत लाइक करते हैं कि गौ सेवा के लिए दान किया जाना चाहिए । पर यह सिर्फ सुनने पढ़ने और प्रशंसा करने का ही विषय नहीं है यह कर्म करने का विषय है । इसमें कर्म का मतलब यह है कि जो पाठक हैं वह स्वयं भी दान करें और करवाएं , लोगों को प्रेरित करें और खुद भी प्रेरित हो और दान की क्रिया करें । मेरे पिछले लेख को जैसे 300 लोगों ने तो पढ़ा ही होगा और अगर पढ़ने के बाद वह औसत प्रति व्यक्ति ₹5000 का दान गौ सेवा के लिए करते हैं तो उससे 1500000 रुपए एक बार में एकत्रित हो जातें है ।

यह राशि गौ सेवा को करने के लिए कुछ समय के लिए कार्य में अवश्य आती है । यह भी ध्यान रखना है कि जो कुछ भी आप दान करते हैं , बह आपके अपने कल्याण के लिए ही है । मानव कल्याण से गौ भी प्रसन्न होती है । जहां गऊ प्रसन्न होंगी , वहां गुरु भी प्रसन्न होंगे और भगवान कृष्ण भी प्रसन्न होंगे और वह जब प्रसन्न होंगे तो दान कर्ता का कल्याण होना निश्चित है । यह बहुत शुभ कार्य है और इस पर बगैर अधिक सोचे समझे हुए इस पर क्रियान्वयन करना चाहिए । और मेरा अनुरोध है कि आप इसको अवश्य ही करें । जब समाज में दान की परंपरा स्थापित हो जाएगी तो देसी गौ माता का संरक्षण और संवर्धन दोनों ही बढ़ते चले जाएंगे । गायों की संख्या का बढ़ना आध्यात्मिक , सामाजिक , सांस्कृतिक और आर्थिक उन्नति का बहुत बड़ा पैरामीटर है । इस लुप्त होती हुई दान की परंपरा को अवश्य ही पुनर स्थापित करना है । बाबा जी की गौशाला केवल और समाज और मानव कल्याण के लिए ही है । यहां किया हुआ दान केवल परमार्थ के लिए ही है । यहां गायों का पालन अपने किसी स्वार्थ के लिए नहीं किया जाता है बल्कि परमार्थ के लिए ही किया जाता है । दान करें और पुण्य कमाए । पुण्य को संचित करना उतना ही अधिक आवश्यक है जितना कि धन को संचित करना । बल्कि धन को संचित करने से भी अधिक आवश्यक है पुण्य का संचय करना । इसमें बिल्कुल मत चूकिए। मनुष्यों के पास समय बहुत थोड़ा होता है और उसी थोड़े समय में अधिक से अधिक पुण्यों का संचय करना है। धन हमेशा आपके साथ नहीं रहता पर पुण्य आपके साथ जन्म जन्मांतर तक हमेशा हमेशा रहते हैं । निस्वार्थ और निर्मल मन से दान करने से , आपके घर परिवार में धन की कमी कभी नहीं होती , क्योंकि जितना आप दान करेंगे गौमाता उससे 100 गुना अधिक करके आपको किसी ना किसी रूप में वापस दे देंगी


आजकल आश्रम के लगभग 250 बीघा भूमि पर गौमाता के लिए हरा चारा ( बरसीम और घुड़जई ) बोने के लिए खेतों को तैयार किया जा रहा है । इसमें जुताई के बाद गोबर की खाद डलवाना है , और खेत को तैयार करके उसमें हरे चारे का बीज बोना है । इसके चार , पांच सप्ताह के बाद हरे चारे की कटाई करके उसे छोटी कुट्टी में परिवर्तित करके गौमाता को खिलाना है ।
हरा चारा गौ माता को बहुत प्रिय होता है और लगभग पूरे वर्ष ( दो महीने छोड़कर ) हरा चारा गौ को अर्पित किया जाता है । इसमें उपयोग की हुई दान राशि वास्तव में अन्न दान के समान ही है ।

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अपनी दान राशि निम्नलिखित दो खातों में से किसी एक खाते में प्रवाहित कर सकते हैं ।

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