ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी ने भारत के अनेकों शासकों को यह उपदेश दिया था कि गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाएं उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाएं । यह देश का दुर्भाग्य है कि एक त्रिकालदर्शी महायोगी के निर्देशों को भारत के शासकों ने नहीं माना या उसको वह आज तक ठीक से लागू नहीं कर पाए । कारण जो भी रहे हो इसका परिणाम यह हुआ है कि देसी गायों की संख्या , देश में बहुत बुरी तरह से घट गई है । मनुष्य के लिए सबसे आवश्यक भौतिक वस्तु गौ का दूध , दही और देसी घी है । अगर देसी गाय का दूध और घी भारत के सारे नागरिकों को उपलब्ध हो जाए तो उनके स्वास्थ्य का स्तर बहुत अच्छा बना रहेगा और हॉस्पिटल जाने की जरूरत बहुत ही कम हो जायेगी । पर वास्तव में पूरा भारत भैंस या जर्सी का या यूरियायुक्त दूध पी कर बड़ा हो रहा है और बीमारियां बढ़ती ही जा रही हैं । अगर गायों की संख्या नहीं बढ़ी तो दूध और देसी घी कुछ समय बाद ५०० रुपए लीटर और घी ५००० रुपए किलो हो जाएगा । यह देश के लिए ठीक नहीं है । बाबा जी ने इन सारे शासकों को यह बताया था कि जब तक देश में गौहत्या बंद नहीं होती , तब तक शांति की स्थापना और विकास की गति में तेजी नहीं आएगी । पिछले कई वर्षों से पूरे देश में भयंकर अशांति है । दिल्ली में एक बहुत योग्य और अच्छे प्रधानमंत्री होने के बावजूद देश में हिंसा की घटनाएं बराबर हो रही है । ब्रह्मबेता श्री देवराहा हंस बाबा जी ने कई बरस पहले , जब आश्रम में “ ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा गौ संवर्धन एवं संरक्षण धाम “ का उद्घाटन हो रहा था तब उन्होंने संकल्प लिया था कि गायों का संवर्धन और संरक्षण भारत के समाज को सुनिश्चित करना चाहिए और शासकों की ओर देखना ही नहीं चाहिए । अगर सारी गायों की , चाहे वह वृद्ध हो या सांड हो , रहने खाने पीने की प्रचुर व्यवस्था होती रहे , तो कोई भी व्यक्ति अपनी वृद्ध गाय या सांड को ना तो सड़कों पर छोड़ेगा ना उनको बेचेगा । अब जब गाय बिकेगी ही नहीं तो उसका वध कोई कर ही नहीं पाएगा । कसाई खाने अपने आप ही बंद होने की कगार पर आ जाएंगे और इसकी स्मगलिंग जो बांग्लादेश में बड़े लार्ज स्केल पर हो रही है , वह भी बंद हो जाएगी । देसी गौ का संवर्धन और संरक्षण केवल समाज के द्वारा किया जा सकता है पर यहां पर समस्या यह है कि गौ सेवा के लिए दान करने की लाखों साल पुरानी परंपरा , भारतीय समाज में बहुत कमजोर हो चुकी है । लोगों को इस बात का बोध है कि गौ सेवा के द्वारा वह जीवन के सारे लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं पर बहुत अधिक सोच विचार करने के कारण दान करने में देरी हो जाती है । इस बात को भी प्राय सभी जानते हैं कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में बार-बार इस बात को कहा गया है कि अपनी आय का 10% हिस्सा , जो कि विष्णु अंश कहलाता है , उसको कभी भी अपने पास ना रखें और इसको गौशाला इत्यादि में दान करें । *भगवान कृष्ण ने गीता के तीसरे अध्याय के बारहवें श्लोक में बिल्कुल स्पष्ट बताया है की जगत में जितनी भी संपत्ति है उसके स्वामी केवल भगवान कृष्ण स्वयं हैं और उन्ही के द्वारा जीवात्माओं को संपत्ति इसलिए दी जाती है जिससे मनुष्यों का परिवार ठीक से चलता रहे पर उन्हीं का निर्देश है की अपनी संपत्ति / आय का दस प्रतिशत अंश ( विष्णु अंश ) को अपने पास कभी न रखें और उसको गौसेवा इत्यादि के लिए सात्विक दान कर के अपना कल्याण सुनिश्चित कराएं । बाबा जी की गौशाला केवल इसी कारण चलाई जाती है जिससे जीवात्माओं को अपना विष्णु अंश , दान करने का अवसर प्राप्त हो और वह अपने जीवन को सफल बनाएं । बाबा जी की गौशाला केवल दान पर चलती है और बाबा जी किसी भी सरकार के राजकोष से धन स्वीकार नहीं करते ।
यह केवल इसलिए कि उनके शिष्यों भक्तों और अन्य लोगों का सात्विक दान के द्वारा कल्याण हो । अगर गौशाला कहीं से भी धन ( जिसमें दान का अंश न हो ) लेकर चलाई जाए तो उसके द्वारा मनुष्यों का कोई कल्याण नहीं होता । इसीलिए बाबा जी की गौशाला की सात्विक व्यवस्था केवल और केवल सात्विक दान के द्वारा प्राप्त की हुई राशि से ही की जाती है । इसमें निश्चित रूप से व्यवहारिक कठिनाई आती है , क्योंकि अधिकांश लोग , विष्णु अंश को प्रवाहित नहीं कर पाते हैं या नहीं करते हैं , कारण जो भी हो । इसका परिणाम यह है की गौशाला चलाने में बहुत संघर्ष करना पड़ता है ।
• इस वर्तमान वर्ष में भी गेहूं की फसल काटने में हार्वेस्टर का बहुत अधिक प्रयोग किसानों के द्वारा किए जाने से भूसे का बहुत कम प्रोडक्शन हुआ है और भूसे की सप्लाई कम होने के कारण , भूसे का दाम 5 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 9 रुपए प्रति किलो हो गया है और कुछ दिनों में 11 रुपए प्रति किलो हो जायेगा । सरकारी एवं प्राइवेट गौशालाओं में भूसे की कमी के कारण गौशालाओं की स्तिथि चिंताजनक हो गई है । बाबाजी की गौशाला में तो गौमाता की पूरी सेवा होती है और हो रही है , पर भूसे की कमी इस साल में न हो , *इसको ध्यान में रखते हुए बाबाजी के लगभग २५० शिष्यों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा गया था कि बह सब कम से कम एक ट्रॉली भूसे को procure करवाने के लिए ७५०००/१०००००रुपए या अपनी आय का दशांश ( जो भी संभव हो ) दान राशि ट्रस्ट के खाते में डालने का कष्ट करें । जो व्यक्ति आधी ट्रॉली भूसा दान करना चाहते हैं , बह ४००००/ ५०००० तक की राशि भेजें । जो व्यक्ति एक तिहाई ट्रॉली भूसा कंट्रीब्यूट करना चाहते हैं , बह २५०००/३५००० रुपए की राशि दान करने की कृपा करें । इसके अतिरिक्त कोई और आधार पर दान करना चाहे , तो वैसा करें । एक गौवंश के ऊपर पूरे वर्ष में लगभग 51000 रुपए का खर्चा होता है । अगर एक गौमाता को अपनी आध्यात्मिक माताजी मानकर सेवा करी जाए तो इस आधार पर भी दान किया जा सकता है । अपनी आय का दशांश ( विष्णु अंश ) दान करने का निर्देश तो हमारे शास्त्रों में हजारों साल से अंकित है । जैसा ठीक लगे वैसा करें ।
कुछ भक्तों ने अपनी सहयोग राशि प्रवाहित कर दी है पर बाकी लोगों को यह कार्यवाही करना शेष है । यह दान कार्य शीघ्र करने से भूसे को कम रेट और राशि में खरीदा जा सकता है
• भारत के कल्याण के लिए , भारत को अखंड बनाने के लिए सनातन धर्म को विश्वव्यापी करने के लिए और जीव आत्माओं के अपने कल्याण के लिए यह परम आवश्यक है की सात्विक दान के द्वारा गौ सेवा की परंपरा को अपनी पूरी शक्ति से पुनर्स्थापित किया जाए । इसलिए जब आप सात्विक दान करते हैं तो यह न केवल आपके लिए बल्कि देश के लिए भी कल्याणकारी होता है ।
• विंध्याचल की देवरहा हंस बाबाजी की गौशाला एक परमशक्तिशाली सिद्धाश्रम में स्थित है और इसका संचालन भी आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा ही किया जाता है । भारत की हर जीवात्मा/ नागरिक इस आश्रम में गौसेवा करने के लिए स्वतंत्र है । अकाउंट के डिटेल्स नीचे दिए गए हैं । गौसेवा के लिए दान की गई राशि पर ५० प्रतिशत इनकम टैक्स की छूट इनकम टैक्स act के सेक्शन 80 G के अंतर्गत , भारत सरकार द्वारा स्वीकृत है ।
• Brahmvetta Shri Devaraha Hans Baba Trust
A/C no. 10539167271
SBI VINDHYlACHAL
IFSC CODE. SBIN0002625
दानकर्ता , दान की और अपनी सूचना , व्हाट्सएप नंबर 9999535099 पर भेजने का कष्ट करें ।





