श्रीदेवराहा कृष्ण शरणम परावाणी गायन 10

पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 6 दिसम्बर 2020  का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 1125 से 1232 तक का है | ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपनी परावाणी में स्पष्ट बता रहे हैं कि श्री देवराहा बाबा सर्व शक्ति का दान करने वाले हैं और पूर्ण भाव को देने में पूर्णतया समर्थ है | श्री देवराहा बाबा जी का भगवान श्री कृष्ण के साथ में पूर्ण योग सत्य है और उसके द्वारा उत्पन्न ज्ञान और दृष्टि पूर्ण सत्य है । यह ज्ञान आत्म ज्ञान है और वाह्य पोथी ज्ञान से बिल्कुल भिन्न है यह ज्ञान हमारे शास्त्रों में वर्णित तो हो सकता है पर इसको केवल अनुभव के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है ।श्री देवराहा बाबाजी का सर्व योग , शक्ति प्रेम और भक्ति को देने वाला है । यहां पर शक्ति , प्रेम का अर्थ वह नहीं है जिसको साधारणतया भौतिक जगत में समझा जाता है । यह शक्ति भौतिक जगत की सारी शक्तियों से बिल्कुल भिन्न है और इस भगवत शक्ति के द्वारा ही भौतिक दृश्य जगत का संचालन होता है इसीलिए पूज्य  बाबाजी के श्री मुख से जो भी शब्द निकलता है वह सत्य में अवश्य परिवर्तित हो जाता है । इसी तरह से पूज्य बाबाजी और भगवान श्री कृष्ण में जो प्रेम का संबंध है यह प्रेम वह नहीं है जो सांसारिक रिश्तो में दिखाई देता है । यह प्रेम दिव्य है और आध्यात्मिक जगत की बहुत बड़ी उपलब्धि है , यह प्रेम समर्पण और श्रद्धा पर आधारित है । जब मनुष्य अपना सारा अहम और अहंकार छोड़कर सदगुरु की शरण में पूर्णरूपेण रूप से चला जाता है तब सद्गुरु उसको अपना लेते हैं और उसके जीवन का सारा भार अपने ऊपर ले लेते हैं । सद्गुरु के सामने “शरणागति ” सबसे सरल और सबसे प्रभावशाली जीवन जीने का तरीका है क्योंकि इसके द्वारा हमारे भौतिक पर मिथ्या दृश्य जगत के और अदृश्य पर वास्तविक जगत के सारे उद्देश्य पूरे हो जाते हैं ।

विडियो लिंक :-

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https://youtu.be/iLfdy3jhnS8

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