पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 21 नवम्बर 2020 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 340 से 436 तक का है | ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपनी परावाणी में ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी के बारे में बता रहे हैं कि अगर कोई मनुष्य देवरहा बाबा जी का नित्य ध्यान करता है , चिंतन करता है , तो उसको नित्य कुछ ना कुछ ज्ञान की प्राप्ति होती है । यह कौन सा ज्ञान है ? यहां सांसारिक ज्ञान या भौतिक जगत के ज्ञान की बात नहीं हो रही है , यह शाश्वत ज्ञान की बात हो रही है , जो कि सदैव आत्मा के साथ में स्थिर होकर चलता है और रहता है । शाश्वत जगत का ज्ञान होने के पश्चात भौतिक जगत के ज्ञान को बहुत सरल और सहज तरीके से प्राप्त किया जा सकता है । श्री देवराहा बाबा के ऊपर ध्यान लगाने से , चिंतन करने से कृष्ण भाव की प्राप्ति होती है , जिसको केवल पूर्ण शरणागति के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है ।पूज्य बाबाजी हर स्थिति में नित्य निरंतर प्रेम का रूप है , प्रेम का पूर्ण भाव है । उनके दर्शन से कृष्ण भाव का दर्शन होता है , आनंद की प्राप्ति होती है । न केवल कृष्ण प्रेम प्राप्त होता है , बल्कि उसकी चेतना और दृष्टि भी प्राप्त होती है , कृष्ण प्रेम का ज्ञान होता है और अनुभूति होती है कि यह कृष्ण प्रेम , साधारण भौतिक जगत के प्रेम से बिल्कुल ही भिन्न है और इसमें पूर्ण संतोष और आनंद मिलता है।
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