पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 5 दिसम्बर 2020 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 981 से 1124 तक होगा | आज के परावाणी दोहों में इस बिंदु को बहुत शक्तिशाली रूप से दर्शाया गया है कि श्री देवराहा बाबा जी का नित्य निरंतर ध्यान , पूर्ण योग की तरफ ले जाता है । और यह कि पूज्य बाबाजी भगवान श्री कृष्ण की सर्व शक्ति से पूर्ण संपन्न है , यह हमेशा हमेशा के लिए हैं । परम शक्ति से परिपूर्ण होने के कारण जो कुछ भी बाबाजी शब्द और वाक्य बोलते हैं वह हमेशा सत्य सिद्ध होते हैं ।श्री देवराहा बाबा जी न केवल इन शक्तियों को धारण करते हैं वरन वह इन शक्तियों को अपने शरणागत शिष्यों और भक्तों को पूर्णतया देने में सक्षम भी है । पर इन समस्त शक्तियों का प्रयोग , प्रेम और भक्ति को देने में किया जाता है जिससे कि मनुष्यों के और राष्ट्रों के सब काम सिद्ध होते हैं , यह भगवत शक्ति उनकी सांसारिक इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए नहीं होती वरन् उनके हित में होने वाले कार्यों को संपादित करने में इस की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है । श्री देवराहा बाबाजी पूर्ण ज्ञानी है , नित्य ज्ञानी है , सदा शाश्वत ज्ञान को धारण करते हैं । नश्वर भौतिक जगत का ज्ञान शरीर के साथ में नष्ट हो जाता है पर एक महायोगी का ज्ञान शाश्वत होता है सनातन होता है और सदैव बना रहता है । इस महानतम ज्ञान जिसकी चर्चा आध्यात्मिक परिपेक्ष्य में हो रही है , इसकी भौतिक जगत के ज्ञान से तुलना नहीं की जा सकती ।पोथी वाले ज्ञान को पढ़ पढ़ के और उसमें महारथ हासिल करके बहुत सारे विद्वान , प्रोफेसर , डॉक्टर , कथाकार इत्यादि अहंकार में चूर रहते हैं जबकि वह जीवन की मूल समस्याओं को सुलझाने में बिल्कुल अक्षम है । जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य आत्मा को परमात्मा से मिलाना होता है , जिससे आत्मा का हजारों जन्मों और शरीरों में आना-जाना रुक जाए और भगवान के साथ में उसका पूर्ण योग और मिलन हो जाए । अगर यह सारी समस्याएं सुलझानी है , तो महा योगियों की शरण में जाना होगा , उनके प्रति पूर्ण शरणागति का भाव उत्पन्न करना होगा इस आध्यात्मिक ज्ञान से न केवल आत्मा बल्कि शरीर और भौतिक जगत की छोटी बड़ी समस्याएं अपने आप सुलझती रहती हैं। इसलिए महायोगी और उनके जीवन दर्शन में आस्था और शरणागति होना परम आवश्यक है । बाबाजी की परावाणी मानव समाज की भटकती और भूली आत्माओं को सही दिशा में ले जाने के लिए सक्षम और सहायक है और उनके भौतिक उद्देश्यों को प्राप्त करवाने में भी सक्षम हैं ।
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