पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित ” श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 31 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 4630 से 4738 तक का है | ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी , ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी की असीम दया के बारे में बता रहे हैं । महानतम महायोगी की शक्ति अपने या अपने शिष्यों के कल्याण तक सीमित नहीं रहती । महा योगियों के भगवान के साथ में पूर्ण एकीकरण के पश्चात उनको व्यक्तिगत तौर पर किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं है , पर भगवान श्री कृष्ण के योग शक्ति के द्वारा उनके अंदर जो असीम दया का समुद्र जागृत होता है , उस के कारण वह पूरे विश्व के कल्याण के लिए कार्य करना शुरू करते हैं , उनका वैश्विक दृष्टिकोण उनकी दया से उत्पन्न होता है , जब वह देखते हैं कि पूरा विश्व भटका हुआ है , माया जगत में बुरी तरह से उलझा हुआ है और भगवत तत्वों की सच्चाई को बिल्कुल भूल चुका है तो मानवता को उससे मिलने वाले अपार दुख को देखते हुए , वह जनता के कल्याण के लिए कार्य करना प्रारंभ करते हैं । इस कार्य को करने की शक्ति भगवान श्री कृष्ण की योग शक्तियों से उन्हें हमेशा प्राप्त रहती है । कई बार लोग अपने अज्ञानता वश यह कहते हैं , कि बाबाओं को राजनीति से क्या लेना देना है । बाबा लोगों को तो केवल भगवान के बारे में ध्यान और चिंतन करना चाहिए । वह यह नहीं जानते कि बड़े से बड़े राजनीतिक नेता के पास ना तो दिव्य ज्ञान होता है , ना भविष्य का दिव्य दर्शन होता है , ना उसके अंदर दिव्य शक्ति होती है , वह कोई भी कार्य अपने आप स्वयं पूरा नहीं कर सकता । नेताओं की अपूर्णता अज्ञानता और मानव की अनवरत मूर्खताओं को देखते हुए महायोगी यह निर्णय लेते हैं , कि वह संसार में रहकर , संसार में कष्ट भोग कर भी , वह पूरी मानवता के कल्याण के लिए कार्य करते रहेंगे , चाहे इस बात को कोई जान पाए या ना जान पाए । यह बात पूरी सत्य है कि भारत में भगवान श्री राम की जन्मभूमि की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी और ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी ही हैं इनके अतिरिक्त बाकी जो भी राजनीतिक पार्टियां , राजनेता या और संस्थाएं हैं उन्होंने भौतिक जगत के स्तर पर काम तो किया है पर मेरी समझ से उसको आध्यात्मिक कर्ता नहीं माना जा सकता । वह अच्छे सज्जन लोग हैं पर वह वास्तविक दृष्टि से कर्ता नहीं है । पिछले 500 वर्षों में ऐसे बहुत से राजनीतिक नेता और संस्थाएं और सेनाएं हुई जो इस कार्य को करने के लिए हर तरह से लड़ते-लड़ते समाप्त हो गई पर उसको पूरा नहीं करा पाए , अब एक महायोगी की कृपा से यह कार्य संपन्न हुआ है । ऐसा भी कह सकते हैं कि इस की घड़ी आ गई थी और भगवान की लीला के अनुसार इसको तो होना ही था पर बात यह है कि किसके द्वारा होना था तो यह बात स्पष्ट है कि यह महा योगियों की कृपा और उनके नेतृत्व उनके अदृश्य शक्ति प्रयोग के द्वारा यह कार्य संपन्न हुआ है। इसी प्रकार से अखंड भारत का निर्माण करवाने में सबसे बड़ा योगदान ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी और ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी का था , है , और रहेगा । भारतवर्ष जो विश्वव्यापी था पिछले 2000 वर्षों से आसुरी तत्वों से प्रभावित होकर सनातन धर्म की राह पर नहीं चल पा रहा है और बुरी तरह से खंडित हो चुका है । उसको खंडित करने की आसुरी शक्तियां निरंतर प्रयास कर रही हैं ,उसमें भारत की आंतरिक आसुरी शक्तियां भी बाहरी आसुरी शक्तियों का पूरा साथ दे रही हैं , पर अब 2000 साल के भयंकर कष्टों के बाद , अब भगवान श्री कृष्ण का यह निर्णय हो चुका है कि अखंड भारत का निर्माण उनके अध्यात्मिक प्रतनिधि महायोगियों पूज्य देवराहा बाबा जी और पूज्य देवराहा हंस बाबा जी के द्वारा करवाया जाना निश्चित है , और वह कार्य हो रहा है । जितनी भी भारत को खंडित करने की कामना रखने वाली और प्रयास करने वाली शक्तियां है वह पूर्णतया विफल हो जाएंगी और भारत की सीमाएं ,अपना पूर्व रूप लेकर बिल्कुल बदल जाएंगी । भारत विश्वव्यापी होगा और सनातनधर्म भी विश्वव्यापी होगा । जो सत्य है उसकी स्थापना होगी धर्म की स्थापना होगी और यह कार्य कितनी भी मुश्किलों के बाद में हो , पर यह होकर ही रहना है ।
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