पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित ” श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 23 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 4085 से 4193 तक का है |ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपनी परावाणी में ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी के गुणों और उनके विराट स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं । बाबा जी बता रहे हैं कि ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी नित्य निरंतर केवल सत्य का ही दर्शन करते हैं और इसके अतिरिक्त उन्हें कोई और दर्शन नहीं होता अर्थात माया जगत या जीव आत्माओं की कामनाएं और वासनाएं उन्हें प्रभावित नहीं करती ना विचलित करती हैं । श्री देवराहा बाबा जी का दर्शन ,भगवान श्री कृष्ण के पूर्ण योग से पूर्ण दर्शन है , भगवान श्री कृष्ण के प्रेम का दर्शन है । बाबाजी सर्व ज्ञानी है , ज्ञान के और भाव के पूर्ण ज्ञानी है । श्री देवराहा बाबा जी कृष्ण प्रिय प्रेम भाव को , उनकी भक्ति को और भगवान श्री कृष्ण की अनन्य शक्ति को देने वाले परमदाता भी हैं । वह नित्य निरंतर आनंद का दर्शन करते हैं और पूर्ण आनंद की अवस्था में रहते हैं । बाबाजी इस परमप्रिय आनंद को भी देने वाले सबसे बड़े दानकर्ता हैं । बाबाजी परम दिव्य शक्ति हैं और बाबा जी का दर्शन सत्य शक्ति का दर्शन है । बाबाजी का नित्य निरंतर ध्यान केवल सत्य अर्थात भगवान श्री कृष्ण पर ही रहता है । इस ध्यान योग मुद्रा में वह उच्चतम प्रेम भाव का दर्शन करते हैं और पूर्ण योग का दर्शन करते हैं । पूर्ण ज्ञान की दृष्टि के द्वारा उनको भगवान श्री कृष्ण में और उनके प्रेम में निरंतर परम प्रीति बनी रहती है । बाबा जी का दर्शन परम कृपा का दर्शन है , दया योग का दर्शन है , कृष्ण प्रेम का दर्शन है । कृपा और दया , बाबाजी के भगवान श्री कृष्ण के साथ में पूर्ण योग के द्वारा , उनके स्वरूप से निरंतर नदी के समान प्रवाहित होती रहती है ।
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