पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 20 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 3761 से 3869 तक का है | ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबाजी की परावाणी और इसके गायन का श्रवण सबके लिए है , सब के कल्याण के लिए है और केवल बाबा के शिष्य , भक्त और श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं है । ऐसे सभी व्यक्ति जिन्होंने कभी श्री देवराहा बाबा जी या श्री देवराहा हंस बाबा जी का दर्शन भी ना किया हो , वह भी इस वाणी को सुनकर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं । बाबाजी के सीधे दर्शन होना अगर संभव नहीं है तो कोई बात नहीं है । इस ग्रंथ के सारे ५००० दोहों में भगवान श्री कृष्ण और ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी का नाम हमेशा आता है । यह एक महानतम सदगुरु और भगवान श्री कृष्ण के पूर्ण योग के सारे भावों और अवस्था को दर्शाता है । भगवान श्री कृष्ण और ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी का नाम परम कल्याणकारी है और उनके नाम में ही सारी आध्यात्मिक शक्ति और ऊर्जा भरी हुई और छिपी हुई है। कलयुग में नाम जप का सर्वाधिक महत्व बताया गया है – ” कलयुग केवल नाम अधारा , सुमिर सुमिर नर उतरहीं पारा ” । कलयुग में भगवान को प्राप्त करने के लिए बहुत सरल और सहज उपाय केवल नाम का ही जाप है । अगर क्लिष्ट संस्कृत के मंत्र नहीं भी आते हैं तो केवल श्रद्धा पूर्वक नाम जप करने से भी ईश्वर और उनके ज्ञान , प्रेम और आनंद की प्राप्ति हो सकती है। परावाणी के प्रतिदिन गायन और उसके श्रवण से नाम का स्मरण होता है और नाम का अनंत प्रभाव शरीर मन और आत्मा पर सहज रूप से होता चला जाता है , और भगवान के प्रति विमुखता और उदासीनता हल्के हल्के श्रद्धा और प्रेम में बदल जाती है , मानव के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो जाता है । इसीलिए इस परावाणी के गायन का और उसके श्रवण का बहुत महत्व है ।
ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी का दर्शन ” सत्य ” का दर्शन है भगवान कृष्ण ही ” सत्य ” हैं । उनका दर्शन परम दिव्य है। दूसरे शब्दों में भगवान श्री कृष्ण का और उनके ज्ञान का दर्शन , बाबा जी के दर्शन करने से ही हो जाता है क्योंकि बाबाजी ने भगवान श्री कृष्ण को पूर्ण रूप से पूर्ण शरणागति के द्वारा प्राप्त कर लिया है । श्री देवराहा बाबा का सुमिरन , नित्य आनंद प्रदान करने वाला है , यह भगवान श्री कृष्ण में पूर्ण प्रीति और पूर्ण शरणागति के द्वारा हुए ज्ञान योग से प्रकट होता है । ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी की परम पूर्ण शक्ति , भगवान श्री कृष्ण की ही पूर्ण शक्ति है , जो उन्होंने पूर्ण शरणागति के द्वारा प्राप्त करी है । बाबा जी के चरण कमल में पूर्ण शरणागति के द्वारा साधारण जीवात्माएं भी इस शक्ति को प्राप्त कर सकती हैं ।
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