पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का पावन मकर सक्रांति पर्व 19 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 3653 से 3761 तक का है | ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी के द्वारा अपनी परा वाणी में रचित इस ग्रंथ में 5000 दोहे हैं । यह कोई साधारण मनुष्य की वाणी नहीं है ,यह भगवान श्री कृष्ण की वाणी है जोकि ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के श्री मुख से प्रवाहित हो रही है । बाबा जी ने अपनी परा वाणी में बहुत अधिक ग्रंथों की रचना करी हैं । बाबा जी इसी को अपना पूर्ण धन मानते हैं , इसके अतिरिक्त उनके पास कोई और धन है ही नहीं । बाबाजी का कहना है कि आजकल के व्यस्त वातावरण में मनुष्यों को पढ़ने का समय नहीं है , पर उसके श्रवण करने में कोई समस्या नहीं है । इसका श्रवण मात्र ही मनुष्यों के लिए परम कल्याणकारी है , बाबा जी कहते हैं कि उनके हर ग्रंथ का एक एक शब्द भगवान कृष्ण की पूर्ण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत है और यह जहां भी श्रवण किया जाता है उस स्थान का वातावरण शुद्ध हो जाता है और श्रोताओं का कल्याण होता है। सांसारिक बुद्धि और विद्या से परिपूर्ण लोगों की समझ में यह बात आए या ना आए , इसका कल्याणकारी स्वरूप और इसका सांसारिक मामलों पर प्रभाव , हम लोगों ने कई बार देखा और अनुभव किया है । जब बाबाजी ने एक बार वृंदावन में हनुमानजी से इस के गायन के बारे में पूछा तो उन्होंने बाबाजी को कहा कि अदिति विष्णुप्रिया से ही गायन कराना है । बाबाजी ने मुझे कहा । तो जब हनुमान जी का और बाबाजी का आदेश है तो वह तो होना ही है और हो ही रहा है । बाबाजी ने कहा कि अगर सरकारी अधिकारी बनती या व्यापार करती या राजनेता बनती , उन सबसे अच्छा तो भगवान कृष्ण और हनुमानजी की सीधी सेवा करने का कार्य इन सब से बहुत अधिक अच्छा है और सर्वोत्तम है और करोड़ों आत्माओं के लिए कल्याणकारी है , बहुत अधिक परमार्थ का कार्य है , ऐसा करने से ही इस लोक और परलोक में भगवत प्रेम ,आनंद और शक्ति की पूर्ण प्राप्ति होगी । यह बहुत बड़े परमार्थ का कार्य है और इसकी सांसारिक और आध्यात्मिक उपयोगिता की जानकारी भी लोगों को हो ही जाएगी । और उसका कार्य बाबा के आदेश को पालन करके अपने और परिवार के लोक और परलोक को सुधारना है। अदिति की गोलोकवासी माताजी और भारत के महान दिव्य संत इसको गौलोक में रहकर भी श्रवण करते होंगे और हम लोगों को ऐसा अनुभव होता है ।
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