पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का पावन मकर सक्रांति पर्व 18 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 3544 से 3652 तक का है | ब्रह्मबेता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपने सदगुरुदेव ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी के बारे में बता रहे हैं कि उनका भगवान श्री कृष्ण के साथ में पूर्ण योग , भगवान श्री कृष्ण के चरण कमलों में प्रीति को उत्पन्न करता है । भगवान श्री कृष्ण को वर्तमान समय में पृथ्वी पर रहने वाले किसी मनुष्य ने तो देखा नहीं है क्योंकि वह गुप्त और अदृश्य है , पर श्री देवराहा बाबा जी के दर्शन से भगवान श्री कृष्ण के दर्शन हो जाते हैं । उनके दर्शन के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के प्रेम का दर्शन , उनकी शक्ति का दर्शन , उनकी भक्ति का दर्शन और इन सभी दिव्य भावों में प्रीति बहुत सहज रूप से हो जाती है । बाबाजी बता रहे हैं कि श्री देवराहा बाबा जी एक ब्रह्मऋषि है जोकि मृत्यु लोक पृथ्वी तक सीमित नहीं है बल्कि उनकी शक्ति भक्ति और प्रेम का दर्शन सारे लोकों में होता है । भगवान श्री कृष्ण की तरह ही श्री देवराहा बाबा जी सारे ब्रह्मांड में , उनके गुणों से युक्त होकर व्याप्त हैं । बाबाजी न केवल पृथ्वी पर बल्कि गौलोक और अन्य लोकों में भी रहते और विचरण करते हैं और वह सबके लिए परम कल्याणकारी हैं । इसका तात्पर्य यह हुआ की देवराहा बाबा जी अपने सच्चे भक्तों के शरीर छूट जाने के उपरांत भी जिस किसी लोक में भी उनकी आत्मा जाती हैं , उनके कल्याण के लिए बाबा जी वहां भी अपने दया और भक्ति रूप से स्थित रहते हैं । संक्षेप में हम यह कह सकते हैं की बाबाजी किसी समय या स्थान ( time and space )की सीमा से बंधे हुए नहीं हैं वह सर्वलोक दृष्टा और सर्व काल दृष्टा है । बाबा जी का दर्शन इसी परिपेक्ष में करना चाहिए तभी यह परम कल्याणकारी होगा , और क्योंकि यह सत्य है इसमें कोई संदेह किसी को नहीं होना चाहिए । ब्रह्मबेता श्री देवराहा हंस बाबा जी स्वयं उनके अंतरंग स्वरूप हैं और जो कुछ भी हो अपने ग्रंथ में बता रहे हैं वह पूर्ण सत्य है ।
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