पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का पावन मकर सक्रांति पर्व 17 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 3435 से 3543 तक का है | इस ग्रंथ की रचना विश्व के महानतम त्रिकालदर्शी महायोगी ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी ने अपनी परावाणी में करी है । यह रचना उनके सदगुरुदेव ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी और भगवान श्री कृष्ण के साथ में उनके पूर्ण योग और उसके साथ होने वाली आध्यात्मिक शक्तियों के उदय के बारे में है । इस महान रचना में मृत्युलोक के मायाजगत के किसी भी व्यक्ति की कोई चर्चा नहीं है , और हो भी नहीं सकती है , क्योंकि यह रचना भगवान श्री कृष्ण की अपनी वाणी में है , जोकि ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी के श्रीमुख से प्रवाहित हुई है । यह रचना परावाणी में है और किसी मनुष्य की वाणी नहीं है और किसी मनुष्य के बारे में भी नहीं है । यह मायाजगत की विषयवस्तु है ही नहीं । यह अदृश्य जगत की अदृश्य शक्तियों की नित्य निरंतर सनातन शक्तियों के बारे में है , जो इस ब्रह्मांड को बनाती और चलाती हैं । इस ग्रंथ के परावाणी में रचित दोहे भगवान श्री कृष्ण की पूर्ण आध्यात्मिक उर्जा से ओतप्रोत है । यह जगजाहिर होने पर भी गुप्त बनी रहती है और भगवान श्री कृष्ण के निर्णय के अनुसार इसको बहुत ही कम जीवात्मायें समझ सकती हैं । वास्तविक स्थिति यह है कि बाबा जी के दर्शन में आने वाले उन के बहुत सारे शिष्य और श्रद्धालु भी इसको ना तो पढ़ते हैं ना सुनते हैं , क्योंकि अत्यंत सरल होने के बावजूद यह अत्यंत गूढ़ भी है और इसका अर्थ आसानी से हृदय में बैठता नहीं है । फिर भी यह भारतीय समाज और राष्ट्र और पूरे विश्व के लिए परम कल्याणकारी है । बाबा जी ने कई बार बताया है कि किसी के पढ़ने या ना पढ़ने से , समझने या ना समझने से इस परावाणी की क्रियात्मक शक्तियों के ऊपर कोई अंतर नहीं पड़ता । यह हर जीव की आत्मा सुनती है , चाहे उसका शरीर सुने या ना सुने और आत्मा का यह एक प्रकार से यह भोजन है । आत्मा ही सनातन है और नित्य है और शरीर अनित्य हैं । परंतु इस ग्रंथ में छिपी हुई अदृश्य जगत की आध्यात्मिक ऊर्जा , आत्मा और शरीर दोनों के लिए बहुत कल्याणकारी है । इसीलिए बाबा जी ने इसके गायन को कराने का निर्णय लिया है और सार्वजनिक रूप से इस को उपलब्ध भी कराया है । बाबाजी का कहना है वर्तमान समय के मनुष्यों को इसको पढ़ने में और समझने में बहुत कठिनाइयां है , पर चलते फिरते और अन्य काम करते समय भी इसको श्रवण करने में कोई कठिनाई नहीं है । इसके श्रवण मात्र से ही मनुष्य का कल्याण अवश्य होता है । कई वर्ष पहले बाबाजी ने अपने वृंदावन आश्रम में मुझे बताया था कि इस परावाणी के गायन के लिए भगवान श्री हनुमान जी ने उनको निर्देशित किया है कि इसको अदिति विष्णुप्रिया के द्वारा गायन कराया जाए । आध्यात्मिक शक्तियों के आदेश के अनुसार ही यह सब आयोजन हो रहा है ,यह आध्यात्मिक शक्तियों की इच्छा और निर्णय है और इस पवित्र कार्य का विश्व कल्याण हेतू पूरा होना अवश्यंभावी है ।
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