पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 7 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 2456 से 2564 तक का है | ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी ने अपने एकनिष्ट ध्यान , एकनिष्ठ शरणागति , सदगुरु के चरणों में पूर्ण शरणागति के द्वारा अपने सदगुरुदेव ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी को पूर्ण रूप से प्राप्त कर लिया है और इसी के द्वारा उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की समस्त प्रेम जन्य शक्तियों , जिनके द्वारा ब्रह्मांड का निर्माण और संचालन होता है , को प्राप्त कर लिया है । हंस बाबाजी , देवराहा बाबा जी के ध्यान योग के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के दर्शन और उनसे पूर्ण एकाकार हो जाने की महान योगिक क्रिया का वर्णन कर रहे हैं , श्री देवराहा बाबा जी की सत्य के साथ प्रीति और प्रेम योग के द्वारा भगवान श्री कृष्ण की समस्त शक्तियों का दर्शन करना , उनको प्राप्त करना और उसको आगे सुयोग्य परम दिव्य और सिद्ध आत्माओं में देने की शक्ति के उदय होने की महान यौगिक क्रिया का वर्णन किया जा रहा है । भगवान श्री कृष्ण की शक्ति और उसके द्वारा प्रकृति और ब्रह्मांड को नियंत्रित और संचालित करने की शक्ति का दर्शन इस ग्रंथ के द्वारा होता है । यह शक्तियां बाबा जी केवल मानव कल्याण के लिए उपयोग करते हैं पर यह साधारण रूप में प्रसाद की तरह सब को वितरित नहीं की जाती हैं । इन शक्तियों को बाबा जी केवल उनको देते हैं जो कि गुरु चरण शरण के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के चरणों में पूर्ण शरणागति को स्थाई रूप से प्राप्त कर चुके हैं । ऐसा बहुत अपवाद स्वरूप ही होता है । सदगुरुदेव ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी ने अपनी समस्त योगिक शक्तियों को अपने पूर्ण शरणागत और अपने आप में एक महानतम महायोगी ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी को ही प्रदान किया है और अन्य किसी को नहीं । यह शक्तियां कोई धारण भी नहीं कर सकता केवल परम सिद्ध योगी ही इसको धारण कर सकते हैं और महायोगी इन शक्तियों के द्वारा समस्त मानव जाति का और अन्य जीव आत्माओं का कल्याण करते हैं और करवाते हैं ।
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