श्रीदेवराहा कृष्ण शरणम परावाणी गायन 20

पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 5 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 2239 से 2346 तक का है |ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी , अपनी परावाणी में श्री देवराहा बाबा जी के लिए यह बता रहे हैं की  श्री देवराहा बाबा और उनका कृष्णयोग किसी समय और सीमा से बंधा हुआ नहीं है और वह सदा सदा से एक महायोगी हैं और रहेंगे । उनके लिए शरीरों का महत्व नहीं है और उनको अपने सारे पूर्व शरीरों और जीवनों की पूर्ण जानकारी और स्मृति है । इसी संदर्भ में कई महान संतों ने  श्री देवराहा बाबा जी को Ageless Mahayogi कहकर पुकारा है । बाबाजी कहते हैं कि मानव शरीर जो कि व्याधियों का भी गृह है और जो मृत्यु लोक में विचरण करता है वह तो अनित्य है । यह तो खैर शरीर की बात है पर पूज्य बाबा जी स्वयं ही कहते थे और कहते हैं कि मैं शरीर नहीं हूं मैं आत्मा हूं । आत्मा अजर अमर है और शरीर अनित्य हैं । शरीर के रहने या ना रहने से आत्मा के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । बाबाजी का भूतकाल कोई योगी ही जान सकता है । जो लोग उनको शरीर मानते हैं वह इस बात को समझने में बिल्कुल असमर्थ है । देवराहा बाबा के कई आश्रमों में कई शिष्यों से भी इस विषय पर कभी-कभी बात होती है तो अधिकतर लोगों के अंदर यही बात रहती है कि शरीर तो इतना पुराना शायद नहीं था । जो अपनी चेतना को शरीर तक सीमित रखते हैं वह बाबा को समझ ही नहीं सकते हैं । हम लोग तो ऐसा मानते हैं कि ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी और ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी में कोई अंतर नहीं है और वह एक ही आत्मा के दो शारीरिक स्वरूप हैं पर आत्मस्वरुप की दृष्टि से एक हैं ।श्री देवराहा बाबा जी अखंड भारत का निर्माण करने के लिए श्री  देवराहा हंस बाबा जी के अंदर उनके अंतर्मन में स्थापित होकर अपने सारे बचे हुए कार्यों को पूर्ण करवा रहे हैं और जो कि अवश्य होने हैं।

विडियो लिंक :-

https://www.facebook.com/100015734981573/videos/940570899810734/

https://youtu.be/p9QK8pnat_o

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