पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 16 december 2020 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 1669 से 1769 तक का है | ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपने सदगुरुदेव ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी के स्वरूप का वर्णन करते हुए बता रहे हैं कि श्री देवराहा बाबा जी का भगवान श्री कृष्ण के साथ में परम योग हमेशा के लिए है और बाबा जी की इस योग में पूर्ण प्रीति है ।श्री देवराहा बाबा जी की अमोघ कृष्ण शक्ति उनको परम प्रिय है , क्योंकि इस शक्ति का प्रयोग मानव और सभी जीवात्माओं के कल्याण के लिए ही होता है । बाबाजी की अमोघ कृष्ण शक्ति में दया का समावेश होने के कारण यह शक्ति परम हितकारी है , इसीलिए यह सभी को परम प्रिय है । इसके विपरीत आसुरी शक्तियों से सभी को भय लगता है क्योंकि आसुरी शक्तियों के साथ में दया का समावेश और योग नहीं होता और यह जीवात्माओ को दुख देने के लिए और परेशान करने के लिए ही प्रयोग की जाती है । आज विश्व में जिन देशों को महाशक्ति कहकर पुकारा जाता है , वास्तव में यह आसुरी शक्ति ही है क्योंकि वह दूसरे देशों के मनुष्यों को दुखी करके अपने सांसारिक भौतिक सुख के लिए कार्य करती हैं । आसुरी शक्तियों का भगवान कृष्ण की अमोघ शक्तियों के द्वारा नष्ट होना अनिवार्य है क्योंकि उसी के द्वारा सुख शांति और समृद्धि की स्थापना सारे विश्व में होनी है । देवराहा तत्व के द्वारा संकल्पित अखंड भारत का निर्माण और उसके लिए आशीर्वाद , इसीलिए ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा निरंतर दिया जा रहा है ।
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