पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 12 दिसम्बर 2020 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 1451 से 1559 तक का है | ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपनी परा वाणी में बता रहे हैं कि वैसे तो देखने में और समझने में ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी और भगवान श्री कृष्ण पृथक पृथक हैं पर श्री देवराहा बाबा जी भगवान श्री कृष्ण के साथ में हुए अपने योग को पूर्ण रूप से देखते हैं भगवान श्री कृष्ण की प्रेम की शक्ति का पूर्ण अनुभव करते हैं और पूर्ण आनंद की अनुभूति में रहते हैं । इस सर्वोच्च अवस्था में दिव्य दृष्टि के द्वारा अनंत अज्ञात और अदृश्य जगत का पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान उनको होता है , पूज्य बाबाजी अपने आत्मज्ञान को और भगवान श्री कृष्ण की पूर्ण शक्ति को अपने सच्चे शरणागत शिष्यों में प्रवाहित करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम है । पर शरणागत भक्त का मिलना बहुत ही कठिन है । ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी के अनेकों शिष्यों में केवल श्री देवराहा हंस बाबा जी पूर्ण शरणागति की परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए और वह अपने आप में ही एक महान त्रिकालदर्शी महायोगी बन गए । ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी के पूर्ण आत्मज्ञान होने के पीछे उनके सद्गुरु ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी की कृपा और शक्ति पूर्णरूपेण दृष्टि से उपस्थित रही है । श्री हंस बाबा जी ने अपनी यह आत्मज्ञान की अवस्था अपने सदगुरुदेव ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी के चरण कमल की शरणागति में जाने के द्वारा ही प्राप्त करी है । ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी के भगवान श्री कृष्ण के साथ में पूर्ण योग होने के कारण शब्द ” देवराहा ” में ही इतनी शक्ति है कि वह जीवन के सारे उद्देश्यों को , शरणागति के मार्ग से , पूर्ण कराने में सक्षम है । श्री देवरहा बाबा का नाम जप अपने आप में अत्यंत शक्तिशाली है , अगर विश्वास और शरणागति के भाव से किया जाए ।
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