पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित ” श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 25 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 4303 से 4411 तक का है | मैंने इस ग्रंथ को श्री शक्ति ग्रंथ बताते हुए इसमें शक्ति के अदृश्य लेनदेन की चर्चा की है । आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा अखंड भारत का निर्माण और सनातनधर्म का विश्वव्यापी होना , ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी की भविष्यवाणियों के अनुसार अवश्यंभावी है । इस कार्य में बहुत अधिक देरी भी नहीं है और यह होने ही जा रहा है। यह तो आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा हो ही जाएगा पर शक्ति का प्रयोग पूर्णानंद की स्थिति को इस लोक और परलोक में प्राप्त करना होता है । आध्यात्मिक ज्ञान और ध्यान से पूर्ण आनंद की प्राप्ति होती है , भगवान श्री कृष्ण के सानिध्य का स्थाई आनंद लेने के लिए सदगुरुदेव के दर्शन और उनके बताए हुए मार्ग पर चलना होता है । इस आनंद का केवल सनातन धर्म में इसके वेदों और पुराणों में आत्मानुभूति के आधार पर वर्णन किया जाता है । इस शब्द ,आनंद का अनुवाद , किसी और भाषा में और वामपंथी या दूसरी अन्य गैर सनातनी पंथो और भौतिकतावादी ( पूंजीवाद , समाजवाद ,मार्क्सवाद ) दर्शन शास्त्रों में उनकी मान्यताओं के अनुसार करना संभव नहीं है । यह आनंद सबके लिए है । अंग्रेजी भाषा में इसका थोड़ा बहुत समानार्थी शब्द Bliss है । पर कोई भी अन्य शब्द , आनंद भाव को वर्णन नहीं कर सकता है यह केवल सनातन धर्म में ही है और क्योंकि यह समता पर आधारित है , इसलिए यह सारी आत्माओं के लिए है । यह मृत्युलोक में भी है और परलोक में भी है । यह आनंद सुख और दुख से परे है और जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है । ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी , ग्रंथ के इस भाग में श्री देवराहा बाबा जी को पूर्ण आनंद दाता बता कर उनका वर्णन कर रहे हैं । बाबा जी कहते हैं कि , श्री देवराहा बाबा जी सदा सत्य और नित्य निरंतर आनंद के रूप हैं , उनका ज्ञान और उनके बारे में ज्ञान पूर्णानंद को देने वाला है । बाबा जी के ज्ञान के द्वारा प्रेम और आनंद की उत्पत्ति होती है , आनंद का पूर्ण भाव प्रकट होता है । बाबा जी परम महाशक्ति हैं , पूर्ण अमोघ शक्ति हैं , जिनके द्वारा भगवान श्री कृष्ण के अमोघ दर्शन होते हैं , स्थाई दर्शन होते हैं और सच्चे दर्शन होते हैं | बाबाजी के प्रेम और प्रेम के रसपूर्ण आनंद के द्वारा अनन्य भक्ति का और भक्ति के रस के आनंद की पूर्ण अनुभूति होती है । देवराहा बाबा जी का दर्शन पूर्णानंद दर्शन है , नित्य आनंद है और ज्ञान से भरा हुआ प्रेम का आनंद है । आनंद एक आत्मावस्था है जो सदा के लिए होती है , जो भगवान श्री कृष्ण के चरण कमलों में पूर्ण शरणागति के द्वारा और सदगुरुदेव के आशीर्वाद और शरणागति के द्वारा , सब किसी को प्राप्त हो सकती है ।
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