पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का पावन मकर सक्रांति पर्व 14 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 3217 से 3325 तक का है | ब्रह्मवेत्ता देवराहा बाबा जी अपने सदगुरुदेव ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी के बारे में यह बता रहे हैं कि श्री देवराहा बाबा जी के भगवान श्री कृष्ण के साथ में पूर्ण योग , सर्व योग के द्वारा बाबाजी को समस्त आध्यात्मिक शक्तियां , पराज्ञान और कृष्ण प्रेम प्राप्त हो गया है और बाबाजी इस ज्ञान , प्रेम और शक्ति को देने में पूर्ण समर्थ है और सत्पात्र जीव आत्माओं को यह उनके द्वारा दान दिया जाता है । विद्या , ज्ञान और दया का दान सबसे बड़ा दान है जो केवल महापुरुष महायोगी भगवान से युक्त होकर साधारण जीव आत्माओं को दान में देते हैं । यह सर्वोच्च कोटि का दान है । बाबाजी बताते हैं कि श्री देवराहा बाबा का जो पूर्ण कृष्ण भाव है वह पूर्ण आनंद दायक है , यहां पर भाव और आनंद का योग है उनका कृष्ण स्वरूप भाव , आनंद को प्रदान करने वाला है । इसी प्रकार से बाबाजी के अंदर पूर्ण आध्यात्मिक प्रेम और पूर्ण आध्यात्मिक आनंद का समायोग सदैव सदैव दिखता है ,और है , इसी लिए बाबा जी ने उनको पूर्णप्रेमानंद कह कर संबोधित किया है । सत्य और आनंद का भी योग बाबाजी के अंदर पूर्णतया समाहित है और यह सारे योग बाबाजी को कृष्ण चरण कमलों में पूर्ण शरणागति के द्वारा प्राप्त हुए हैं । यहां पर यह भी कहना आवश्यक होगा कि एक महायोगी का वर्णन वही कर सकता है जो स्वयं उस महायोग को अपने महायोगी गुरु के द्वारा प्राप्त कर चुका है । वस्तुत: श्री देवराहा बाबा जी और श्री देवराहा हंस बाबा जी में कोई अंतर नहीं है ।
विडियो लिंक :-
https://www.facebook.com/100015734981573/videos/946294072571750/

