श्रीदेवराहा कृष्ण शरणम परावाणी गायन 26

 

पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 11 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 2891 से 2999  तक का है | आज की रचना का मूल विषय महायोगी का दर्शन और उसके लाभों के बारे में है । ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपनी परावाणी में बता रहे हैं कि श्री देवराहा बाबा का दर्शन , शरणागति , ध्यान के द्वारा प्राप्त हुए ज्ञान का दर्शन है , श्री देवराहा बाबा का दर्शन , प्रेम के भाव का दर्शन है , श्री देवराहा बाबा का दर्शन , कृष्ण प्रेम में एक महायोगी की प्रीति का दर्शन है ,श्री देवराहा बाबा जी का दर्शन सदैव और हमेशा सबको प्रिय है , यह ज्ञान योग का दर्शन है । श्री देवराहा बाबा जी का दर्शन कृष्ण चरण दर्शन है । यह सर्व ध्यान दर्शन है और पूर्ण योग का दर्शन है । यह नित्य सत्य और दया मूर्ति का दर्शन है । श्री देवराहा बाबा जी का दर्शन एक सर्वस्व शक्ति का दर्शन है , कृष्ण शक्ति का दर्शन है , सर्वानंद का दर्शन है । श्री देवराहा बाबा जी , सत्य और शक्ति की पूर्ण दर्शित अवस्था होने के कारण , पूर्णेश्वर हैं और इस स्थिति और अवस्था का नित्य निरंतर दर्शन होने के कारण या अनुभूति होने के कारण श्री देवराहा बाबा जी नित्येश्वर भी हैं । अगर संक्षिप्त में कहा जाए , तो श्री देवराहा बाबा जी भगवान श्री कृष्ण के प्रेम , ज्ञान , ध्यान , कर्म और सारे गुणों से पूर्ण युक्त होने के कारण कृष्णमय होने के कारण , स्वयं श्री कृष्ण ही हैं । दोनों में कोई अंतर नहीं है । यह बुद्धि और ज्ञान का विषय ना होकर अनुभूति का विषय है l

विडियो लिंक :-

https://www.facebook.com/100015734981573/videos/944467299421094/

https://youtu.be/DmMAXIDRRZw

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