श्रीदेवराहा कृष्ण शरणम परावाणी गायन 25

पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 10 जनवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 2783  से 2890  तक का है | इन 108 दोहों में मुख्य थीम “शक्ति ” है बाबाजी जी बता रहे हैं कि श्री देवराहा बाबा के गहन ध्यान से शक्ति का अनुभव होता है । यह शक्ति कैसी है ? यह शक्ति परम सत्य है और पूर्ण शक्ति है , पूर्णानंद को देने वाली है , यह एक महाशक्ति है , यह भगवान श्री कृष्ण की अमोघ शक्ति है । अमोघ शक्ति का अर्थ यह है कि जो कभी खाली नहीं जाती । बाबा जी के द्वारा किए हुए सभी संकल्प अपने लक्ष्यों में परिवर्तित होकर पूर्ण हो जाते हैं । बाबाजी का अभी तक का सबसे बड़ा संकल्प अखंड भारत का निर्माण करना है और सनातन धर्म को विश्वव्यापी बनाना है । बाबा जी की कृष्ण अमोघ शक्ति के द्वारा इसका पूर्ण होना अवश्यंभावी है । बाबाजी के ऊपर चिंतन और ध्यान करने से शक्ति का संचालन होता है । बाबा जी केवल शक्तिमूर्ति ही नहीं हैं उनके अंदर से शक्ति का प्रवाह भी होता है । बाबाजी शक्ति को सुयोग्य व्यक्तियों को देने वाले भी हैं । श्री देवराहा बाबा के अंदर दिव्य शक्तियों का दर्शन होता है , देवराहा बाबा की दिव्य सत्य शक्ति , सर्वत्र ज्ञान को प्राप्त कराने वाली है । श्री देवराहा बाबा का ज्ञान सांसारिक विद्याओं तक सीमित नहीं है यह पूर्ण परा विद्या है , जो कि अदृश्य जगत की समस्त विद्याओं को प्रकाशित करती है , परा विद्या को जानना साधारण व्यक्तियों के लिए असंभव है , पर पराविद्या के चर्चा और वर्णन से साधारण व्यक्तियों को भी अभूतपूर्व लाभ होता है । ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी की अनन्य शक्ति उनकी पूर्ण और अनन्य भक्ति के कारण ही है । यह कृष्णप्रेम से जनित है ।, भगवान श्री कृष्ण के अनन्य प्रेम के द्वारा यह शक्ति उदय होती है और सदैव रहती है । बाबाजी का महायोग किसी समय सीमा से बंधा हुआ नहीं है और इसीलिए उनको ageless  महायोगी कहा जाता है ।

विडियो लिंक :-

https://www.facebook.com/100015734981573/videos/943857596148731/

https://youtu.be/FsZlb1GiJWE

 

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