पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 18 december 2020 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 1770 से 1908 तक का है | बाबाजी बता रहे हैं कि ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी की वाणी पूर्ण सत्य है और इसमें कुछ भी असत्य नहीं है । सत्य सनातन होता है हमेशा के लिए होता है जबकि असत्य कुछ समय के लिए होता है अनित्य होता है और हमेशा के लिए नहीं होता । सत्य और असत्य में निरंतर विरोध , भगवान की लीलाओं के अनुसार बना रहता है और अंत में सत्य की विजय होकर असत्य की पराजय होती है । सत्य की हमेशा ही विजय होती है क्योंकि यह सनातन है , सदैव है , नित्य है । सभी की सत्य में इसीलिए प्रीति भी होती है क्योंकि यह नित्य है और जो नित्य है उसमें प्रीति होना स्वाभाविक है । आज हमारे विश्व में जो शक्तिशाली देशों के बड़े नेता हैं वह असत्य बोलते हैं उनकी वाणी में अधिकतर बातें और शब्द असत्य होते हैं , परंतु पूरे विश्व का मीडिया उनके असत्य को प्रकाशित करता रहता है और पत्रकार लोग उनके पीछे भागते रहते हैं । पर वास्तविकता यह है कि उनकी असत्य वाणी थोड़े समय के लिए ही होती है और उसके बाद सत्य की असत्य के ऊपर विजय होने के बाद सारी असत्य वाणी और उसको बोलने वाले लुप्त हो जाते हैं । ऐसा ही वर्तमान में भी होगा जब आसुरी शक्तियों की पराजय होगी और सत्य सनातन धर्म की स्थापना होगी , उनकी असत्य वाणी लुप्त हो जाएगी । देवराहा तत्व के द्वारा पूरे विश्व में सत्य सनातन धर्म को स्थापित करके अखंड भारत का निर्माण इसीलिए कराया जा रहा है।
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