श्रीदेवराहा कृष्ण शरणम परावाणी गायन 14

पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 14 दिसम्बर 2020  का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 1560 से 1668 तक का है |आज वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण भी है और भगवान की प्रार्थना करने का अनमोल अवसर है । ब्रह्मबेता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपनी परावाणी में बता रहे हैं कि श्री देवराहा बाबा जी न केवल मृत्यु लोक (पृथ्वी ) पर बल्कि , पूरे ब्रह्मांड में जिसमें सूर्य चंद्र जैसे अनेक तारे सितारे और प्लैनेट्स शामिल है , पूर्ण आनंद की अनुभूति करते हैं । क्योंकि बाबा जी श्री कृष्ण प्रेम के पूर्ण अनुभवी , ज्ञाता और दाता हैं , उन्हें सब ओर केवल आनंद ही आनंद दिखाई देता है । साधारण मानव जगत में और ब्रह्मांड में बुराइयों का दर्शन करते हैं और नकारात्मक भाव से परिपूर्ण रहते हैं , जबकि एक महायोगी केवल और केवल कृष्णानंद और कृष्ण प्रेम का दर्शन करते हैं और इसी कारण वह पूरे अनंत कोटि ब्रह्मांड की सारी शक्तियों से परिपूर्ण रहते हैं । आनंद , प्रेम और शक्ति एक दूसरे के पूरक हैं  और पूर्ण शांति देने वाले हैं , कल्याण करने वाले हैं  । भगवान में प्रेम करने से सभी वस्तुएं और सभी शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं । भगवान श्री कृष्ण के चरणों में प्रीति और उनमें पूर्ण शरणागति के कारण श्री देवरहा बाबा जी को प्रेम भाव की नित्य निरंतर पूर्ण अनुभूति बनी रहती है और बाबाजी भगवान श्री कृष्ण की समस्त शक्तियों से परिपूर्ण रहते हैं ।श्री देवराहा बाबा जी के शिष्य और उन्हीं के अंतरंग स्वरूप ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपने आप में एक महानतम त्रिकालदर्शी महायोगी है और उनके शिष्यों ने हजारों बार उनकी कृष्ण शक्तियों के द्वारा प्रकृति के पांचों तत्वों पर नियंत्रण होते हुए देखा है । कई बरस पहले बाबा जी ने मुझे कहा कि सूर्य की ओर देखते रहो मैंने देखने के बाद एक सेकंड में ही आंखों को सूर्य से हटा लिया । बाबा जी ने कहा कि जब तक ना कहा जाए , तब तक सूर्य की ओर देखते रहना है । उस दिन मैंने अपने दिल्ली स्थित निवास से सूर्य नारायण जी को दोपहर के समय में लगभग 2 घंटे तक देखा । क्योंकि यह देखना एक यौगिक क्रिया के अंतर्गत हो रहा था , इसलिए आंख के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा । बाबा जी ने बताया की उनकी योगिक क्रियाएं , जिसके द्वारा आकाश तत्व (सूर्य ) में क्रिया की जाती है वो कृष्ण नाम के आधार से ही की जाती है । सारा जगत कृष्ण में है सारा ब्रह्मांड कृष्ण मय है , कृष्ण के अतिरिक्त और कुछ है ही नहीं । यह बहुत बड़ा अनुभव था जिसमें यह देखा गया कि बगैर किसी यंत्र मंत्र और तंत्र के , पृथ्वी से 15 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित सूर्य में प्रचंड क्रिया हुई जिसके द्वारा सूर्य का रंग श्यामल हो गया जैसे कि पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान होता है और केवल एक हीरे की अंगूठी के रूप में सूर्य के दर्शन होते रहे । बाबा जी ने उस समय यह बताया था कि उन्होंने भगवान कृष्ण से जब यह पूछा कि मैं कैसे मानूं कि तुम सूर्य में भी हो और पूरे ब्रह्मांड में भी हो तब भगवान कृष्ण ने उनको कहा कि अपने किसी भी शिष्य को यह योगिक क्रिया करा के दिखाओ । इस प्रकार यह क्रिया हुई और बाबा जी ने बताया की 15 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित एक डिवाइन बॉडी में क्रिया किसी यंत्र के द्वारा नहीं कराई गई है यह केवल कृष्ण नाम का प्रताप है जिसके द्वारा ऐसी क्रियाएं होती हैं । हम लोगों ने इस तरह की हजारों योगिक क्रियाएं बाबाजी के द्वारा प्रकृति के पांचों तत्वों पर आकाश , पृथ्वी , जल , अग्नि और वायु पर होते हुए पिछले 27 वर्षों में अनेकों बार देखी हैं , एक त्रिकालदर्शी महायोगी का प्रकृति के ऊपर पूरा नियंत्रण होता है । प्रकृति भगवान श्री कृष्ण के अधीन होती है और भगवान श्री कृष्ण के साथ में एकीकरण होने के कारण ब्रह्मऋषि , महायोगी इस प्रकार की अद्भुत योगिक क्रियाओं को करने में पूर्ण रूप से सक्षम होते हैं । बाबा जी ने बताया कि इन योगिक क्रियाओं का प्रयोग केवल मानव कल्याण के लिए जैसे कि अखंड भारत के निर्माण के लिए और सनातन धर्म को विश्वव्यापी करने के लिए किया जाता है और किया जाना है ।

https://www.facebook.com/100015734981573/videos/926611414540016/

https://youtu.be/sH6Y3c4SqQI

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Categories