परम पूजनीय ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी का यह संकल्प आशीर्वाद और भविष्यवाणी थी कि राम जन्मभूमि केवल भगवान राम की है और यहां पर केवल भगवान राम का भव्य मंदिर, सबकी सहमति से और बगैर किसी लड़ाई झगड़े के निर्माणित होगा। ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी ने अपना स्थूल शरीर जून 1990 में त्याग दिया, पर सूक्ष्म शरीर और आत्मा से वह आज भी अपने शिष्य और महायोगी ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के अंतरंग स्थल में स्थापित होकर, इन सारे कार्यों का संपादन कर रहे हैं। ब्रह्मवेता श्री देवरहा हंस बाबा जी के श्रीमुख से श्री राम जन्मभूमि विषयक परावाणी मार्च 1992 में प्रगट हुई थी। राम जन्मभूमि विषयक परावाणी एक दिव्य स्क्रिप्ट है जिसके अनुसार राम मंदिर से सम्बन्धित सारी घटनायें समय-समय पर घटित हुई हैं। इस परावाणी में भगवान श्री राम, भगवान कृष्ण और बाबा जी का मिलाजुला संदेश है और कार्य योजना है। यह परावाणी किसी पोथी पर आधारित नहीं है और ना किसी कवि की कविता है, यह भगवान के श्रीमुख से सीधे निकली हुई एक दिव्य स्क्रिप्ट है जिसके अनुसार राम मंदिर का बनना तय हो गया था। इसको नीचे लिखें वर्णन से आत्मसार किया जा सकता है।
१. परावाणी के प्रगट होने के 9 महीने बाद, 6 दिसंबर 1992 में जो जीर्ण शीर्ण और विवादित ढांचा, जो राम जन्मभूमि पर पिछले 500 सालों से खड़ा हुआ था, वह अपने आप प्राकृतिक रूप से ढह गया। यह घटना अनायास प्राकृतिक रूप से घटित हुई थी और इसका कोई आयोजन या प्रयोजन नहीं किया गया था, यह एक दिव्य घटना थी।
२. परावाणी में बाबा जी ने यह स्पष्ट घोषणा की है इसी स्थान पर भगवान राम का अवतरण / जन्म हुआ और उन्होंने राम जन्मभूमि स्थल पर राम मंदिर को स्थित हुए निश्चित रूप से देखा है, भगवान कृष्ण ने यह घोषित किया है कि भगवान राम का मंदिर मैं ही बनवाऊंगा, भगवान राम ने सारे जीवो ( विश्व के सारे मनुष्यों ) को यह बताया है कि यही मेरा जन्म स्थान है और मंदिर का निर्माण तुम सबको यहीं करवाना है। यह एक अद्भुत, चमत्कारी और दिव्य ग्रंथ है, इसी के कारण बाबा जी ने १९९२ से आज तक इस परावाणी की लाखों प्रतियां वितरित करवाई और इसका अनेक तीर्थ स्थानों में और अपने आश्रमों में गायन करवाया गया है। परा वाणी के जो शब्द है वह अपने आप घटनाओं में परिवर्तित हो जाते हैं और अपने आप में महामंत्र है।
३. बाबा जी, जो एक त्रिकालदर्शी महायोगी है उन्होंने अपने भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से इसको देख लिया था कि राम जन्मभूमि स्थल पर ही भगवान राम का भव्य मंदिर लाखों साल से स्थित रहा है। क्योंकि मनुष्य इस बात को अपनी भौतिक दृष्टि से ही समझ सकते हैं इसीलिए उन्होंने परावाणी में यह घोषणा की थी कि मैंने तो इसको अपनी दिव्य दृष्टि से देख लिया है और तुम भी इसको खुदाई करके देख सकते हो। खुदाई होगी तो मंदिर के सारे प्रमाण मिल जाएंगे
४. अब यह कोई सरकारी आदेश या अध्यादेश तो नहीं था जिसको नोटिफाई किया गया हो, यह तो एक दिव्य आदेश था जो कि अपने आप को घटनाओं में परिवर्तित करने की शक्ति रखता है। हाई कोर्ट इलाहाबाद के न्यायाधीशों को अदृश्य जगत से एक गुप्त प्रेरणा हुई जिसके अंतर्गत उन्होंने भारत सरकार के पुरातत्व विभाग को १९९७ में निर्देशित किया कि इस स्थान पर खुदाई करके वहां मंदिर होने के प्रमाणों का पता लगाया जाए। यह काम इसलिए संभव हो पाया क्योंकि इस स्थान का समतलीकरण 6 दिसंबर 1992 में पहले ही हो चुका था, अगर यह स्थान समतल नहीं होता और इस पर कोई ढांचा रहता तो पुरातत्व विभाग के लिए इस कार्य को करना संभव नहीं होता
५. पुरातत्व विभाग ने अपनी रिपोर्ट 2003 में प्रस्तुत कर दी जिसमें यह बात बिल्कुल स्पष्ट रूप से कही गई थी कि इस स्थल पर एक बहुत विशाल और भव्य राम मंदिर होने के बहुत अकाट्य प्रमाण खुदाई करने से मिले हैं। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट इलाहाबाद ने अपना निर्णय मंदिर के पक्ष में अक्टूबर 2010 में सुना दिया पर इसको सारी पार्टियों ने स्वीकार नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट में यह मुकदमा चला गया।
६. नवंबर 2013 में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय चेयरमैन श्री अशोक सिंघल, बाबा जी के दर्शन में उनके विंध्याचल आश्रम में आए और उन्होंने यह प्रार्थना की कि 2014 के संसद के चुनाव में बीजेपी को बहुमत दिलाया जाए जिससे बीजेपी राम मंदिर का कानून के द्वारा रामजन्म भूमि स्थल अयोध्या में निर्माण करा सकें। बाबा जी के आशीर्वाद के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को संसद में बहुमत मिला और मई 2014 में हजारों वर्षों के बाद भारत की पहली सनातन धर्म की सरकार केंद्र में बन गई परंतु 2019 तक यह लोग मंदिर निर्माण के लिए पार्लियामेंट में कानून नहीं बनवा पाए। 21 नवंबर 2018 में जब श्री मोहन भागवत जी सरसंघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बाबा जी के दर्शन में उनके पटना आश्रम में आए तो उन्होंने बाबा जी से कहा कि वह लोग अपने सारे प्रयास करने के बाद भी राम मंदिर निर्माण के लिए कानून को नहीं बनवा सके हैं। बाबा जी ने उनको कहा कि जब सरकार है तो अध्यादेश या कानून बनाने में विलंब का कोई विशेष औचित्य नहीं है और ऐसा तब जब कि मंदिर होने के सारे प्रमाण वहां पर मिल चुके हैं।
७. जनवरी 2019 के प्रयाग के महाकुंभ में संतों को यह आशा थी कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मंदिर के निर्माण की तिथि को वहां पर घोषित करेंगे पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और ना तो अध्यादेश और ना कानून बनाने का कोई वादा किया गया इससे संत समाज में घोर निराशा हुई। ऐसी स्थिति में बाबा जी ने भगवान हनुमान जी का स्मरण किया और उनका आवाहन किया कि अब यह कार्य वह स्वयं संभाल लें। बाबा जी ने यह बताया कि हनुमान जी को भगवान राम के सारे कार्यों को करना अत्यंत प्रिय है “राम काज कीनहे बिना मोहि कहां विश्राम ” हनुमान जी ने इसको सहर्ष स्वीकार कर लिया जिसके परिणाम मई 2019 के संसद के चुनाव में देखने को मिले जिसमें कि सारे राम विरोधी नेताओं और पार्टियों को बुरी तरह से पराजित करवाया गया जिससे कि वह राम मंदिर और अखंड भारत के निर्माण के कार्य में कोई रोड़ा ना अटका सकें।
८. जुलाई 2019 में श्री मोहन भागवत जी बाबा जी के दर्शन में उनके वृंदावन आश्रम में आए तब बाबा जी ने उनको बताया कि अब राम मंदिर का और अखंड भारत के निर्माण का कार्य भगवान हनुमान जी ने अपने ऊपर ले लिया है और बाबा जी की प्रार्थना स्वीकार करते हुए यह सारे काम अब बड़ी तेजी से घटित होने वाले हैं। यह संकेत उनको दे दिया गया था कि राम मंदिर का निर्माण बहुत शीघ्र प्रारंभ होगा और इसके लिए वह पूरी तैयारी रखें। कुछ महीने पश्चात महंत नृत्य गोपाल दास जी बाबा जी के दर्शन में उनके वृंदावन के आश्रम में आए, तब बाबा जी ने उनको बहुत स्पष्ट रूप से यह बताया था कि उनको राम जन्मभूमि न्यास का अध्यक्ष बनाया गया है और अब उनको इस कार्य को पूरा करने के लिए तत्पर रहना है।
९. बाबा जी ने बताया कि हनुमानजी ने अपनी अदृश्य और अमोघ शक्ति से सुप्रीम कोर्ट के सारे न्यायाधीशों को यह गुप्त आध्यात्मिक आदेश ( उन के संज्ञान के बगैर ही ) उनको दिया था कि उनको राम जन्मभूमि वाद में राम मंदिर के लिए सर्वसम्मति से और शीघ्र अपना निर्णय देना है। जैसा हनुमान जी के द्वारा करवाया गया वैसा ही सुप्रीम कोर्ट ने किया और उन्होंने अपना ऐतिहासिक निर्णय पूर्ण साक्ष्य के आधार पर 9 नवंबर 2019 में घोषित कर दिया। यह निर्णय सर्वसम्मति से दिया गया था और इस बात को माना गया था कि इस स्थान पर एक भव्य भगवान राम का मंदिर था और इसलिए सारी विवादित भूमि को भगवान राम के मंदिर को बनाने के लिए सौंपने का निर्णय दिया गया। उन्होंने सरकार को निर्देशित किया कि भव्य राम मंदिर का निर्माण करवाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाए।
१०. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में 19 रिव्यू पिटीशन विभिन्न पार्टियों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए। इसके बाद फिर अनिश्चितता का वातावरण बनने लगा। कानून के जानकार लोग ऐसा समझते थे कि इनका निदान होने में ही दो-तीन वर्ष का समय लग जाएगा और राम मंदिर का निर्माण 2024-25 से पहले नहीं हो सकेगा।
११. पर बाबा जी ने पहले से ही यह स्पष्ट घोषणा कर दी थी कि तमाम बाधाओं को उपस्थित करवाने के बावजूद मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा। क्योंकि इस कार्य को हनुमान जी के द्वारा बाबा जी की प्रार्थना पर करवाया गया था, बाबा जी ने हनुमान जी को अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए अपने शिष्यों को अयोध्या भेजा और 6 दिसंबर से 11 दिसंबर 2019 तक हनुमान गढ़ी अयोध्या, राम जन्म भूमि स्थल, मणिराम दास छावनी, सरयू नदी, कनक भवन इत्यादि करीब 13 स्थानों पर राम जन्मभूमि परावाणी का गायन हुआ और हनुमान जी को सवा 51 मन बेसन के लड्डू से भोग लगाया गया। हनुमान जी को भगवान राम के नाम का श्रवण अत्यंत प्रिय है इसीलिए भगवान राम जन्म विषयक परावाणी का गायन अयोध्या धाम के सारे प्रमुख स्थानों पर करवाया गया और बेसन के लड्डू से भगवान हनुमान जी को भोग लगवाया गया। 6 दिसंबर से 11 दिसंबर तक आदिति विष्णु प्रिया के द्वारा 13 निम्नलिखित स्थानों पर परावाणी का गायन किया गया।
- हनुमानगढ़ी श्री अयोध्या धाम
- कारसेवक पुरम श्री अयोध्या धाम
- अमावा ट्रस्ट राम मंदिर श्री अयोध्या धाम
- मणिराम दास छावनी श्री अयोध्या धाम
- कनक भवन श्री अयोध्या धाम
- दशरथ भवन श्री अयोध्या धाम
- नागेश्वर नाथ जी श्री अयोध्या धाम
- काले राम जी श्री अयोध्या धाम
- सुग्रीव किला श्री अयोध्या धाम
- नंदीग्राम श्री अयोध्या धाम
- जानकी महल ट्रस्ट श्री अयोध्या धाम
- रूसी मंदिर श्री अयोध्या धाम
- सरयू जी श्री अयोध्या धाम
इन सारे स्थानों पर हुए गायन की क्लिप्स को एक जगह पर जोड़ कर आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
https://www.facebook.com/aksaxena.saxena.355/posts/770756853458807
11 दिसंबर को बाबाजी के सब शिष्य विंध्याचल आश्रम वापस लौट आए और हनुमान जी की अदृश्य अमोघ शक्ति के प्रभाव से 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सारी रिव्यू पिटिशन को बगैर सुने रिजेक्ट कर दिया गया। इससे राम मंदिर को बनवाने का कार्य प्रशस्त हो गया।
१२. कुछ महीने पश्चात भारत सरकार ने एक नए ट्रस्ट का गठन किया और जब इसकी घोषणा हुई तो महंत नृत्यगोपालदास को इसका अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया था। बाबा जी को जब यह बात बताई गई तो बाबाजी ने कहा कि हनुमानजी के निर्णय के अनुसार महंत नृत्यगोपाल दास को ही, राम जन्मभूमि न्यास, का अध्यक्ष नियुक्त किया जाना है। कुछ समय पश्चात महंत महंत नृत्यगोपाल दास जी को ही इसका अध्यक्ष बना दिया गया। यहां हम इन बातों में नहीं जाते हैं कि सांसारिक प्रक्रिया किस प्रकार से हुई पर अंतिम निर्णय बाबा जी की भविष्यवाणी के अनुसार और हनुमान जी के निर्णय के अनुसार ही हुआ, और महंत नृत्यगोपालदास जी को “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ” जो कि नए ट्रस्ट का नाम है, उसका अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। देवरहा हंस बाबा जी ने इसके अतिरिक्त कई बार इस बात को बताया था कि भगवान राम के भव्य मंदिर को, कारसेवक पुरम अयोध्या में रखे हुए मॉडल, के अनुसार ही बनना है और इस मॉडल में कोई परिवर्तन नहीं होना है। ऐसा ही हुआ, प्रस्तावित मंदिर का आकार और क्षेत्रफल कुछ बढ़ा दिया गया पर उसका जो मूल ढांचा था वह मॉडल के अनुसार ही रहेगा और भव्य मंदिर का निर्माण उसी मॉडल के अनुसार हो रहा है। मुझे विश्व हिंदू परिषद के किसी अधिकारी ने यह बताया था कि 1989 के प्रयागराज महाकुंभ के दौरान विश्व हिंदू परिषद के अधिकारियों ने देवरहा बाबा जी को इस मॉडल को उनके मंच पर प्रस्तुत किया था और उसको स्पर्श करके वापस करने की प्रार्थना की थी। बाबा जी ने उस मॉडल को अपने मंच पर 15/20 मिनट रखा, उसको चारों तरफ से छूकर और अपना आशीर्वाद देकर उसको वापस कर दिया। उस दिन के 31 वर्ष बाद बाबाजी के निर्णय के अनुसार ही मंदिर का निर्माण अब प्रारंभ हो रहा है। विश्व हिंदू परिषद के अधिकारियों ने यह भी बताया था की 1989 के कुंभ में जब से बाबा जी ने राम मंदिर के काष्ट मॉडल को स्पर्श करके वापस किया था, उसके बाद से मंदिर के आंदोलन में बहुत अधिक धन पूरे विश्व से प्राप्त हुआ जिसको ” राम जन्म भूमि न्यास ” जो कि पहले का बना हुआ ट्रस्ट था, उसमें इसका प्रयोग और संचय किया गया। पत्थरों का कार्य पिछले 31 वर्षों से इसी मॉडल के अनुसार चलता रहा था और इनको अब निर्माण इस हो रहे भव्य राम मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
१३. नवनिर्मित ट्रस्ट ने भव्य राम मंदिर को राम जन्मभूमि स्थल पर निर्माण का प्रारंभ करने के लिए भूमि पूजन की तिथि 5 अगस्त 2020, को निश्चित करी और इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि बनाकर आमंत्रित किया गया। ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी ने अत्यंत प्रसन्न होकर अपनी कृतज्ञता हनुमान जी को व्यक्त करते हुए अपने ट्रस्ट के द्वारा, 1 लाख 51 हजार, बेसन के देसी घी के लड्डुओं को बनवाने का आदेश दिया और इन दिव्य लड्डुओं के द्वारा हनुमानजी का और भगवान श्रीराम का प्रसाद, 5 अगस्त 2020, को पूजास्थल पर लगवाने का निर्णय किया। इस कार्य को संपन्न करने के लिए बाबाजी ने 21 भक्तों को इस कार्य को संपन्न करने के लिए अयोध्या, चार-पांच दिन पहले भेजा। जब भगवान राम और भगवान श्री हनुमान जी को प्रसाद में लगाने के लिए लड्डुओं का निर्माण प्रारंभ हुआ तो यह बात पूरे देश और विदेश में आग की तरह फैल गई और हजारों पत्रकारों ने लड्डू निर्माण स्थल अयोध्या पर आकर, ट्रस्ट के अधिकारियों और भक्तों से जानकारी प्राप्त करके,अनेक समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में इन समाचारों को लगातार 7 दिन तक प्रेषित किया। बाबा जी ने बेसन के देसी घी के लड्डू का प्रसाद अनेकों बार लगवाया है पर इस बार यह इतना प्रसिद्ध हो गया कि हर व्यक्ति लड्डू प्रसाद को लेने के लिए बहुत उत्सुक हो गया था भारतवर्ष के बहुत सारे आश्रमों में और मंदिरों में प्रसाद को भेंट किया गया और उत्तर प्रदेश सरकार के सारे मंत्रियों को और केंद्र सरकार में सारे कैबिनेट और स्टेट मंत्रियों को बहुत अधिक संख्या में लड्डू प्रसाद का, बाबा जी की रामजन्मभूमि विषयक परा वाणी पुस्तिका और राम ओढनिया के साथ में प्रसाद का वितरण किया गया। बाबाजी के आदेश के अनुसार अदिति विष्णुप्रिया के द्वारा अयोध्या के सारे प्रमुख मंदिरों में और भगवान राम के जन्मभूमि स्थल पर परावाणी गायन का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो बड़े सुचारू रूप से संचालित हुआ। हनुमान जी की कृपा से और बाबाजी के आशीर्वाद के अनुसार ना अयोध्या में और ना ही कहीं और, कोई भी आशंकित हिंसा की घटना घटित नहीं हुई, बाबाजी की जो मूल भविष्यवाणी थी कि भगवान राम के मंदिर का निर्माण इसी स्थान पर अवश्य होगा, सर्वसम्मति से होगा, कानून के द्वारा होगा और शांति पूर्वक होगा, यह बात पूर्णतया सिद्ध हो गई। 500 बरस के पश्चात हमारे महानतम महा योगियों ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी एवं ब्रह्मबेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के संकल्प, कृपा और आशीर्वाद से यह कार्य अब संपन्न हो चुका है। बाबा जी ने उसी दिन हम को यह बताया कि अदृश्य जगत से अदृश्य रूप से हनुमान जी और कई देवी देवता इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अपने अपने लोकों से आए थे और संपन्न होने के बाद वापस लौट गए। हनुमान जी “जय श्री राम ” का निरंतर नारा लगाकर पूजन के समय हवा में बड़ी प्रसन्नता के साथ में नृत्य करते रहे। बाबा जी ने बताया कि यह एक बहुत बड़ी आध्यात्मिक घटना थी जिसमें महान आध्यात्मिक शक्तियों देवी देवताओं ने आकर राम मंदिर के निर्माण के लिए पूरे मंदिरों में और भगवान राम के जन्मभूमि स्थल पर परावाणी गायन का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो बड़े सुचारू रूप से संचालित हुआ। हनुमान जी की कृपा से और बाबाजी के आशीर्वाद के अनुसार ना अयोध्या में और ना ही कहीं और, कोई भी आशंकित हिंसा की घटना घटित नहीं हुई, बाबाजी की जो मूल भविष्यवाणी थी कि भगवान राम के मंदिर का निर्माण इसी स्थान पर अवश्य होगा, सर्वसम्मति से होगा, कानून के द्वारा होगा और शांति पूर्वक होगा, यह बात पूर्णतया सिद्ध हो गई। 500 बरस के पश्चात हमारे महानतम महा योगियों ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी एवं ब्रह्मबेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के संकल्प, कृपा और आशीर्वाद से यह कार्य अब संपन्न हो चुका है। बाबा जी ने उसी दिन हम को यह बताया कि अदृश्य जगत से अदृश्य रूप से हनुमान जी और कई देवी देवता इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अपने अपने लोकों से आए थे और संपन्न होने के बाद वापस लौट गए। हनुमान जी “जय श्री राम ” का निरंतर नारा लगाकर पूजन के समय हवा में बड़ी प्रसन्नता के साथ में नृत्य करते रहे। बाबा जी ने बताया कि यह एक बहुत बड़ी आध्यात्मिक घटना थी जिसमें महान आध्यात्मिक शक्तियों देवी देवताओं ने आकर राम मंदिर के निर्माण के लिए पूरे देश को आशीर्वाद दिया था और अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी। इसी दिन अखंड भारत के निर्माण की नीव भी पढ़ चुकी थी।
अतुल कुमार सक्सेना

