पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का 25 नवम्बर 2020 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 541 से 740 तक का है | ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी अपने महानतम ग्रंथ में यह बता रहे हैं कि यहां जो शरणागति , ध्यान , प्रेम , कृष्ण भाव में प्रीति , कृष्ण प्रेम का दर्शन , शक्ति की अनुभूति , शक्ति का दान , आनंद की अनुभूति इत्यादि जिसका इस ग्रंथ में वर्णन किया गया है , वह केवल पृथ्वीलोक तक सीमित नहीं है । वास्तव में पृथ्वी लोक या मृत्यु लोक आत्मा के बहुत सारे ठिकानों में से एक स्थान है , इसके अतिरिक्त अनंत ब्रह्मांड में बहुत सारे लोक हैं । बाबा जी यहां जिस ज्ञान , प्रेम और आनंद की चर्चा करते हैं वह सारे लोकों में व्याप्त है । श्री देवराहा बाबा जी के ऊपर ध्यान करने से किसी भी लोक में सत्य ज्ञान की प्राप्ति होती है सत्य प्रेम की अनुभूति होती है और आनंद ही आनंद प्राप्त होता है । सनातन धर्म के शास्त्रों में हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने दिव्य दर्शन से अपनी दिव्य दृष्टि के द्वारा देख कर बहुत तरह के लोकों का वर्णन किया है । सर्वोच्च लोक , गौलोक , वैकुंठ लोक और शिवलोक हैं , इसके अतिरिक्त कई तरह के स्वर्ग और नरक भी है और अपने-अपने कर्मानुसार मनुष्यों की आत्माओं को जीवात्माओं को अलग-अलग लोको में विचरण करते हुए यात्रा करनी पड़ती है । जन्म और मरण के चक्र से मुक्ति को और आवागमन की समाप्ति को ही मुक्ति माना जाता है । आत्मा को गोलोक की प्राप्ति उसके आवागमन का चक्र के रुकने बाद ही होती है । इस ग्रंथ का ज्ञान ऐसे ही ज्ञान के बारे में है जो सारे लोकों में लागू रहता है और आत्म ज्ञान और मुक्ति का सहज और सुगम साधन है ।
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