श्री देवराहा कृष्ण शरणम् परावाणी गायन 1

पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्णा शरणम् ” का  17  नवम्बर 2020  का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 1 से 108 तक होगा |ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी वर्तमान भारतवर्ष के महानतम त्रिकालदर्शी योगी और महानतम संत हुए हैं । बाबाजी का शरीर लगभग 300 वर्ष पुराना था , इसी कारण उनको भारत के संतो ने ”  Ageless Mahayogi ”  कहकर पुकारा है । बाबाजी ने अनेकों बार स्वयं कहा था कि वह शरीर नहीं है और अनंत काल से रह रही महाचैतन्य आत्मा हैं । देवरहा बाबा जी ने अपना पंच तत्वों से बना शरीर योगिनी एकादशी पर जून 1990 में अपने वृंदावन आश्रम में त्याग दिया । शरीर त्यागने से पहले बाबा जी ने अनेकों बार अपने शिष्य श्री हंस बाबा को यह बताया था की अपना भौतिक शरीर छोड़ने के उपरांत भी वह भारत में रहकर भारत और विश्व के लिए सारे कल्याणकारी कार्यों को करते रहेंगे ।  देवराहा बाबा जी ने बताया था कि वह भारत पर  भविष्य में आने वाले संकटों को देख चुके हैं और भारत को इन सारे संकटों से बचाने का कार्य वह स्वयं करेंगे । श्री देवराहा बाबा जी अपने सूक्ष्म शरीर और आत्मा से अपने सबसे योग्य शिष्य और अपने आप में एक महानतम महायोगी श्री हंस बाबा जी के पवित्र शरीर में रहकर अखंड भारत के निर्माण और सनातन धर्म को विश्वव्यापी बनाने का कार्य आज भी कर रहे हैं । वर्तमान काल में यह हमारे पवित्र शास्त्रों में वर्णित ” परकाया प्रवेश ” का एकमात्र और सबसे बड़ा उदाहरण है । वर्तमान समय में आसुरी तत्वों से  रामसेतु की रक्षा और राम जन्म भूमि की मुक्ति का पूरा श्रेय देवराहा तत्व को जाता है ।अब आगे निकट भविष्य में अखंड भारत का निर्माण और सनातन धर्म का विश्वव्यापी होना इसी क्रम में होने वाली बहुत बड़ी भविष्य की घटनाएं हैं । ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा जी जोकि ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी के अंतरंग स्वरूप है और जिनकी काया में देवराहा बाबा जी विराजमान होकर सारे कार्य करते हैं , उन्होंने अपनी परावाणी में ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी के सगुण स्वरूप का , उनके अंदर विराजमान भगवान् श्री कृष्ण की अमोघ शक्ति का और उनके द्वारा भारत को  दिए जा रहे दया और शक्ति के दान का विवरण और वर्णन , इस महान ग्रंथ “श्री देवराहा कृष्ण शरणम ” में बहुत विस्तार से किया है । यह वास्तव में एक महान शक्ति से भरपूर और आध्यात्मिक प्रेम से सराबोर महान ग्रंथ है । बाबा जी की परावाणी वास्तव में भगवान कृष्ण की परावाणी है जो कि ब्रह्मबेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के श्रीमुख से निर्सित  हुई है । यह परावाणी आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी हुई है और इसके श्रवण से मनुष्यों के और देशों के सारे कार्य सिद्ध होते हैं । श्री देवराहा हंस बाबा जी ने अपनी परावाणी में रचित ग्रंथों की परावाणी के गायन का कार्य और  दायित्व आदिति विष्णुप्रिया को सौंपा है । आज से इस महान ग्रंथ के 108 दोहों का नित्य प्रतिदिन गायन किया  जाएगा । यह सब बाबाजी के  आशीर्वाद और आदेश के अनुसार किया जा रहा है ।

विडियो लिंक :-

https://www.facebook.com/100015734981573/videos/906770636524094/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Categories