पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित “श्री देवराहा कृष्णा शरणम् ” का 18 नवम्बर 2020 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 231 से 339 तक होगा । ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी केवल सत्य का दर्शन करते हैं और जो कुछ भी कहते हैं वह पूर्ण सत्य होता है । ध्यान मार्ग से भगवान के योग को प्राप्त हुए ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी केवल कृष्ण के प्रेम को देखते हैं और यह स्पष्ट कहते हैं यह महायोग की स्थिति केवल भगवान के समक्ष पूर्ण शरणागति के द्वारा ही प्राप्त हो सकती है । बाबाजी जो भी शब्द या वाक्य बोलते हैं वह हमेशा प्रिय होते हैं और पूर्ण होते हैं क्योंकि वह भगवान कृष्ण के पूर्ण दर्शन पर आधारित होते हैं , और दर्शन पूर्ण शरणागति के आधार से ही होता है । बाबा जी की दिव्य दृष्टि और उसके आधार पर बोले हुए वाक्य और शब्द जिनमें प्रेम का भाव समाहित रहता है वह पूर्ण आनंद का ही रुप होते हैं । देवरहा बाबा ही पूर्ण आनंद है इस परा वाणी का जितना मनन और चिंतन किया जाए उतना ही अधिक कल्याणकारी है । यह न केवल मानवों के लिए वरन् सनातन धर्म के विस्तार , प्रचार और प्रसार के लिए बहुत अत्यधिक महत्वपूर्ण है ।
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