पूज्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी द्वारा रचित ” श्री देवराहा कृष्ण शरणम् ” का षटतिलाएकादशी के परम शुभ अवसर पर 8 फरवरी 2021 का गायन अदिति विष्णुप्रिया के, द्वारा ग्रन्थ के सूत्र संख्या 4848 से 5000 तक का है |श्री देवराहा कृष्ण शरणम में 5000 दोहे हैं , इसी से इस ग्रंथ का परावाणी गायन आज पूरा हो जाएगा । गायन तो चलता रहेगा पर नवंबर से प्रारंभ हुए इस बार के गायन का कार्यक्रम आज समाप्त होगा । इस महान ग्रंथ में बाबा जी की परावाणी में जो कुछ कहा गया है वह वास्तव में भगवान श्री कृष्ण के ही शब्द हैं , उन्हीं के परा स्वरूप और उनके अदृश्य जगत में से निकली हुई वाणी है , जो ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा जी के श्रीमुख से प्रवाहित हुई है । यह पूरा वर्णन और प्रार्थना भगवान श्री कृष्ण के द्वारा श्री देवराहा बाबा की ही की जा रही है । ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी और भगवान श्री कृष्ण में परम पूर्ण योग होने के पश्चात दोनों में कोई भेद नहीं रहता , बाबा जी भगवान श्री कृष्ण को जपते हैं और भगवान श्री कृष्ण श्री देवरहा बाबा को जपते हैं , और बाबा का वर्णन करते हैं । बाबा जी की भगवान श्री कृष्ण के चरण कमलों में पूर्ण शरणागति के कारण उनका पूर्ण एकीकरण भगवान श्री कृष्ण के साथ में सदैव सदैव से है , था और रहेगा । बाबाजी कोई 100 , 500 , 1000 , 5000 वर्ष पुराने योगी नहीं हैं , Ageless Mahayogi ( किसी आयु या सीमा काल से परे महायोगी ) हैं । वास्तव मे श्री देवराहा बाबा जी अनादि काल से हैं । भगवत तत्व और गुरु तत्व दोनों का उदय , और सनातन धर्म का उदय एक साथ ही हुआ है और यह अनादि है । गुरु तत्व और भगवत तत्व एक ही सच्चाई के दो पहलू हैं , एक ही सिक्के के दो रूप हैं । यहां पर यह भी कहना परम आवश्यक होगा कि भगवान श्री कृष्ण और श्री देवराहा बाबा जी के पूर्ण परम योग का वर्णन करने वाले भी कोई साधारण योगी नहीं है । ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी स्वयं ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी के एकमात्र अंतरंग स्वरूप है । उनके अतिरिक्त ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा जी का कोई अंतरंग स्वरूप नहीं है । ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी के अंतर्मन में अपनी आत्मा और सूक्ष्म शरीर को स्थापित करके ब्रह्मऋषि श्री देवराहाबाबा जी , पृथ्वी पर गौरवशाली अखंड भारत की स्थापना कर रहे हैं और इसी के साथ ही वह सनातनधर्म को विश्वव्यापी अवश्य बनाएंगे । ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा जी ने अनेकों अनेक बार यह भविष्यवाणी करी है , संकल्प किया है कि अखंड भारत का उदय होकर रहेगा और कैलाशमानसरोवर के साथ भारत से छीनी हुई सारी पवित्र भूमि भारत में दोबारा लौटकर आयेगी और अखंडभारत का निर्माण करवाएगी । इसका अभिप्राय यह हुआ कि आज का वर्तमान चीन , जो कि भगवान को नकारता है और जिसके पास आध्यात्मिक शक्ति शून्य है , वह खंडित हो जाएगा और उसी के साथ में जो उसका दूसरा आसुरी साथी यानी पाकिस्तान है , वह भी समाप्त/ खंडित हो जाएगा । कश्मीर में जो कि सनातन धर्म का बहुत बड़ा केंद्र रहा है ,वहां पर सनातन धर्म पुनर्स्थापित होगा । ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा जी और ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी सनातन धर्म की स्थापना करने के लिए और भारत को पुनः आध्यात्मिक विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए इस धरा पर , इस मृत्यु लोक पर , अपनी पूरी आध्यात्मिक शक्ति के साथ में क्रियाशील हैं । बाबा जी का यह ग्रंथ एक महान शक्ति ग्रंथ है इसीलिए बाबा जी ने इस ग्रंथ को भारत सरकार के सारे वरिष्ठ मंत्रियों के पास में भिजवाया था जिससे कि वह आध्यात्मिक शक्ति से युक्त होकर देश के लिए कठोर निर्णय ले सके , अखंड भारत का निर्माण करवा सकें और आसुरी शक्तियों को पराजित कर सकें । आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा और देवराहा तत्वों के द्वारा अखंड भारत का निर्माण होना अवश्यंभावी है , इसको कोई रोक नहीं सकता यह सामने प्रकट हो जाएगा।
जय श्री कृष्णा । जय श्री देवरहा बाबा जी की । जय श्री देवरहा हंस बाबाजी की ।
विडियो लिंक :-
https://www.facebook.com/100015734981573/videos/961652237702600/

