बाबा जी का पंच तत्व पर पूर्ण नियंत्रण

प्राकृतिक आपदाओं से आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा भारत की रक्षा
भारतवर्ष का सनातन इतिहास , सरकारी इतिहासकारों के द्वारा लिखा हुआ वह इतिहास नहीं है , जो विश्वविद्यालयों , स्कूलों और विद्यालयों में आजकल पढ़ाया जाता है । यह सरकारी इतिहास अधिक से अधिक 2000 वर्ष पुराना है और भ्रमित करने वाला भी है , परंतु सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति करोड़ों वर्ष पुरानी है । सनातन धर्म का जन्म सृष्टि के साथ ही हुआ और सनातन धर्म ही केवल था , है और हमेशा के लिए रहेगा । भारत का इतिहास अगर कोई जानना चाहता है तो उसको हमारे महायोगियों और परम पवित्र ग्रंथों की तरफ ही मुड़ना होगा । अगर इन ग्रंथों का अध्ययन किया जाए तो उससे यह पता लगता है कि जब जब भारत पर प्राकृतिक आपदाएं आई थी तो उसका निदान उच्च कोटि के संत और महा योगियों के आध्यात्मिक हस्तक्षेप के द्वारा किया गया था । यह होता आया है और हो रहा है और होता रहेगा । यह भगवान की लीला है । प्राचीन भारत में जब भी इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं आती थी तो शासक वर्ग और राजा अपने सदगुरु या उच्च कोटि के महा योगियों से प्रार्थना करते थे कि इस प्राकृतिक आपदा को नष्ट या कम करके उनकी प्रजा की रक्षा करें । आजकल का शासक वर्ग भारत के उच्चतम और सत्य इतिहास से बिल्कुल अनभिज्ञ है और वह अपने आप को ही कर्ता मानकर किसी आध्यात्मिक महापुरुष से इस विषय में ना तो प्रार्थना करते हैं और ना ही ईश्वर से प्रार्थना करते हैं । ऐसा शायद इसलिए है कि शासक राजगद्दी पर बैठने से पहले संविधान की शपथ लेते हैं और संविधान में आध्यात्मिक शक्तियों के हस्तक्षेप के माहात्म्य में को कहीं दर्शाया नहीं गया है । आज का शासक वर्ग इन कार्यों में आध्यात्मिक हस्तक्षेप के लिए महा योगियों से प्रार्थना करें या ना करें , महायोगी फिर भी अपना कार्य निश्चित रूप से करते ही हैं । महायोगी जो दया और परमार्थ का असीम सागर होते हैं मानव समाज के कल्याण के लिए अदृश्य जगत में हस्तक्षेप करके विशेष रूप से भारत को तो अवश्य ही बचातें हैं ।
हमारे प्राचीन इतिहास में अनेकों प्रमाण मिलते हैं । बहुत प्राचीन काल में जब भारत के समाज को परेशान करने वाले दैत्य कालकेय इत्यादि जब समुंदर में जाकर छुप गए थे तो अगस्त मुनि ने समुद्र को अपने चुल्लू में रख कर पी लिया था जिससे कि छिपे हुए असुर बाहर निकल के आए और देवताओं के द्वारा मारे जा सकें । इसी तरह से ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा ने कई बार उत्तराखंड और अन्य पहाड़ों के जंगलों में लगी हुई आग का अग्निपान किया जिससे कि जीव जंतु वृक्ष इत्यादि का जीवन बचाया जा सके । इसी क्रम में ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी महाराज ने पिछले 20 वर्षों में अनेकों बार सुनामी या चक्रवाती तूफान से संबंधित प्राकृतिक आपदाओं को बहुत अधिक नियंत्रण करके मानव और उसकी संपत्ति को होने वाले नुकसान को बहुत कम किया है । यह एक बहुत बड़ा विषय है पर इसको जानना सभी के लिए बहुत आवश्यक है ।
रामचरितमानस में लिखा है
जो चेतन को जड़ करई , जड़ हि करेई चैतन्य ।
अस समर्थ श्री रघुनायकी , भजही जीव ते धन्य ।।
कि जो जड़ को चेतन कर देता है और चेतन को जड़ कर देता है, ऐसे समर्थ श्री रघुनाथ जी को जो जीव भजते हैं, वे धन्य हैं ।
भगवान राम जो की जड़ और चेतन के हर कण में है उनके लिए जड़ को चेतन करना और चेतन को जड़ करना नित्य प्रति पल पल का कार्य है और ऐसे समर्थ रघुनाथ जी को जो भी भजते हैं वह धन्य है । भगवान राम ब्रह्मर्षि देवरहा बाबाजी के सब कुछ हैं और उनके अतिरिक्त इस ब्रह्माण्ड में और कुछ है ही नहीं । देवरहा बाबाजी का भगवान राम के साथ में पूर्ण एकीकरण के कारण बाबाजी को दिव्य दर्शन की शक्तियों के द्वारा भूतकाल, वर्तमान और भविष्य को देखने की पूर्ण क्षमता प्राप्त है। बाबाजी त्रिकालदर्शी महायोगी हैं । बाबाजी को दिव्य दर्शन की शक्तियों के अतिरिक्त कारक शक्तियां , जिसके द्वारा प्रकृति के पांचों तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण होता है , भी प्राप्त हैं । भगवान राम , महायोगी को इन शक्तियों से इसलिए युक्त करते हैं जिससे बो मानव और जगत के समस्त प्राणियों के कल्याण परमार्थ के लिए कार्य करते रहें । ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबाजी , अपना स्थूल शरीर जून १९९० में त्यागने के बाद , अपने सूक्ष्म शरीर और आत्मा को अपने परमप्रिय पूर्ण शरणागत शिष्य ब्रह्म वेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी के अंतर्मन और अंतरात्मा में स्थापित करके भारत को संकटों से , दैवीय आपदाओं से बचाते हुए भारत को अखंड बनाकर सनातन धर्म को विश्वव्यापी करने के लिए कृत्संकल्पित और कार्यरत हैं ।
ब्रह्म वेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा जी ने भारत की अनेकों बार भारत की दैवीय आपदाओं से और भारत / सनातन धर्म के ऊपर आतंकी और शत्रु देशों से होने वाली साजिशों और कार्यवाही को विफल करके भारत की रक्षा करी है और आगे भी करते रहेंगे । बाबाजी ने ३/६ /२०२० को मुंबई और सूरत गुजरात की निसर्ग चक्रवाती तूफान ( प्राकृतिक आपदा ) से रक्षा करी थी जिसके ऊपर मैंने ३ जून को एक पोस्ट लिखी थी । बाबाजी ने ऐसी कई प्राकृतिक आपदाओं से भारत की रक्षा पिछले बीस वर्षों में कई बार करी है । इस से संबंधित कुछ ऐतिहासिक तथ्यों की चर्चा , बाबाजी के मंगलौर स्तिथ शिष्य श्री सतीश कामथ , ने निम्नलिखित इंग्लिश में लिखे नोट में करी हैं । यह कार्य किसी साधारण मनुष्य के द्वारा बिल्कुल भी संभव नहीं है । जो व्यक्ति बाबाजी को मनुष्य मानकर उनके कार्यों का आंकलन और विष्लेषण करने का प्रयास करते हैं , बो बड़ा मूर्खतापूर्ण कार्य करते हैं । यह विषय विद्या और बुद्धि से परे होते है और इनको देख कर केवल श्रृद्धा और विश्वास से युक्त मनुष्य के द्वारा केवल वर्णन किया जा सकता है । बाबाजी साधारण मनुष्य ना होकर देव पुरुष है जिनके द्वारा दैवीय आपदाओं को टाला जा सकता है या होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है ।बाबाजी के शब्द इच्छित घटनाओं में अवश्य परिवर्तित होते हैं । इसका वर्णन भी बहुत कीन ऑब्जर्वेशन ( उत्सुक प्रेक्षक ) और करेज ऑफ कनविक्शन ( दृढ़ विश्वास की हिम्मत ) के द्वारा ही किया जा सकता है और यह सबके द्वारा संभव भी नहीं है । पर यह कार्य कैसे कार्यान्वित होते हैं उसका किसी वैज्ञानिक विधा से विष्लेषण नहीं किया जा सकता । हम यह तो कह सकते हैं कि भयंकर तूफान अनायास कमजोर पड़ गया पर यह कैसे हुआ क्यों हुआ , यह बताना वैज्ञानिक दृष्टि से असंभव है । यह आध्यात्मिक परा विज्ञान है जिसके मास्टर केवल महायोगी ही हो सकते हैं ।
Note received from Mr Kamath Mangalore
1. On 31.10.2012 Babaji saved Chennai city from catastrophe of Neelam storm. The speed of the wind was reduced to 110 km from 175 km when it hit the sea shore. Till today the reason for slowing down of speed is unknown to the scientists. Damage caused was very less.
2. Few years back, due to heavy and incessant rain in Chennai for several days, water level reached till second floor of flats in few areas. People could not come out of the house to buy daily needs. When I pleaded Babaji to stop the rain, He said people there eat lot of meat so let them face the result of it now. But I said there are people who believe in God and also don’t eat meat, then He reluctantly agreed. Immediately rain stopped and life was restored to normalcy in Chennai.
3. In 2019, by the time Babaji came to know about Cyclone, it had landed near Puri, in Orissa in the early morning. Time left was very minimal. Still Babaji’s Sankalp saved Puri temple from any damage although cyclone had damaged coastal area and nearby areas of Orissa and West Bengal very badly.
4. Very recently, in May, 2020, Babaji was not informed about Cyclone which hit West Bengal very badly. Since, Babaji did not interfere there was lot of casualty and damage to properties in West Bengal which we all know.
5. This time about Nisarga cyclone, I informed Babaji through my friend about its arrival. Cyclone was supposed to hit Mumbai and Surat. But, what happened today we all know. There was only heavy rain in Mumbai and Cyclone never reached Surat.
There were several miracles done by Babaji which is beyond common man’s imagination.
As regards Corona effect, my belief is that, by the grace and blessings of Babaji we, all his bhakths, will be safe.
We are all truely blessed by Babaji’s grace
Jai Baba Sarkar ki???.
K. Sathish Kamath
Mangalore
03.06.2020
बाबा जी का जल तत्व पर पूर्ण नियंत्रण है और इसके बारे में मैंने पहले भी कई लेख लिखे हैं । 2002 में बाबा जी ने सूरत समुद्र के खारे जल को हजारों लोगों के सामने मीठा किया था और इस परिवर्तित जल को , वहां उपस्थित बहुत से लोगों ने पिया भी था । खारे जल को मीठा करने वाली बाबाजी की योगिक क्रियाएं , पूरे संसार में कई स्थानों पर विशेषकर भारत में कई जगह पर देखी गई है जिन्हे मैं अगले लेख में आपके सामने प्रस्तुत करूंगा ।
अतुल कुमार सक्सेना

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