अखंड भारत का आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा उदय होने का और सनातन धर्म के विश्वव्यापी होने का आशीर्वाद , संकल्प और भविष्यवाणी , एक महायोगी संत के द्वारा भारत के शासक वर्ग को ।
श्री मोहन भागवत सरसंघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 28 जनवरी 2020 में ब्रह्मवेता श्री देवराहा हंस बाबा जी के आश्रम में उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए आए थे ।
सबसे पहले श्री देवराहा बाबा मंच धाम में एक पूजा का आयोजन किया गया जिसमें आदिति विष्णु प्रिया के द्वारा बाबा जी द्वारा रचित श्री राम जन्मभूमि परावाणी का गायन किया गया और तत्पश्चात हनुमान जी का 60 हजार बेसन के लड्डुओं से भोग लगाया गया , श्री मोहन भागवत जी के द्वारा । श्री मोहन भागवत जी को बाबा जी ने निर्देशित किया था कि हनुमान जी की पूजा करते समय हनुमान जी से कैलाश मानसरोवर की भारत वापसी को उनसे मांगे और इसका संकल्प लगातार होता रहे ।आधे घंटे की पूजा के दौरान श्री भागवत जी ने इस संकल्प को किया । इस पूजन को आयोजन करने का एक और महत्वपूर्ण कारण यह था कि हनुमान जी के प्रति श्री राम जन्मभूमि विवाद में अंतिम निर्णय , सुप्रीम कोर्ट के द्वारा होने के कारण उनको कृतज्ञता व्यक्त की गई थी । बाबा जी जानते हैं कि इस कार्य को हनुमान जी के नेतृत्व में आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा ही संपादित किया गया था ।उसके पश्चात वह बाबा जी के दर्शन में उनके मंच के समक्ष पहुंचे उस समय का वीडियो विंध्याचल में पोस्ट नहीं हो पाया था उसको आज पोस्ट किया जा रहा है ।

बाबा जी ने लगभग 2 घंटे के अपने उपदेश में श्री मोहन भागवत जी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अन्य पदाधिकारियों को एक महत्वपूर्ण भविष्यवाणी करी की कैलाश मानसरोवर जो कि इस समय चीन के गैरकानूनी कब्जे में है उसको भारत में लेकर ही आना है और यह होकर ही रहेगा उन्होंने भागवत जी को बताया कि इस कार्य को राजनैतिक सत्ता के द्वारा संपन्न नहीं कराया जा सकता और यह कार्य आध्यात्मिक सत्ता और आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा फलीभूत होगा बाबा जी ने कहा वह केवल संकल्प ही नहीं लेते , केवल भविष्यवाणियां ही नहीं करते , केवल आशीर्वाद ही नहीं देते बल्कि उनको पूरा करवाने के लिए कृतसंकल्प रहते हैं और पूरा करा कर ही छोड़ते हैं । स्पष्ट बात है कि इस कार्य को आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा ही अदृश्य रूप से संपन्न कराया जाएगा । बाबा जी ने फिर उनको बताया कि यह काम कैसे होगा क्योंकि चीन इस वक्त दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है और भारत उसकी तुलना में भौतिक दृष्टि से कमजोर पड़ता है , पर चीन में आध्यात्मिक शक्ति बिल्कुल नगण्य है जबकि भारत आध्यात्मिक शक्ति से हमेशा सराबोर रहा है । भारत भगवान राम और भगवान कृष्ण की भूमि है जिसमें उनकी ऊर्जा सदैव विद्यमान रहती है इसीलिए भारत के लिए कोई भी काम करना बिल्कुल ही संभव है । जो पवित्र और जनकल्याण का कार्य हो और जो असंभव दिखता हो , उसको भी आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा संभव किया जाता है । कैलाश मानसरोवर भारत का ताज है भारत का सिरमौर है और संतों की बहुत बड़ी धरोहर है इसको प्राप्त करने के लिए संतों का जो दृश्य और अदृश्य दोनों हैं , उनका यह बहुत बड़ा संकल्प है कि कैलाश मानसरोवर को हर सूरत में भारत में वापस लाया जाएगा । चीन वैसे भी एक नास्तिक और मलेच्छ देश है जो भगवान में विश्वास नहीं रखता और प्रकृति का सम्मान ना करके विश्व के सारे संसाधनों को केवल अपने स्वार्थ के लिए भक्षण करना चाहता है , इसी के कारण वहां की आध्यात्मिक शक्ति बिल्कुल शून्य है । जिस देश में आध्यात्मिक शक्ति नहीं होती वहां की व्यवस्था बहुत लंबे समय तक नहीं चलती । चीन एक नास्तिक और नकली कम्युनिस्ट देश है और दुनिया के लिए बहुत बड़ा एक खतरा है । इस लिए चीन की इस व्यवस्था को नष्ट होना ही होना है । बाबाजी अपनी परावाणी में इस की स्पष्ट घोषणा और भविष्यवाणी पिछले चार वर्षों से लगातार कर रहे हैं । बाबाजी त्रिकालदर्शी महायोगी हैं और उनकी परावाणी किसी पोथी या भौतिक अध्ययन पर आधारित नहीं होती यह अंतरात्मा के परमात्मा से हुए योग और उसके द्वारा प्रगट हुए पूर्ण आत्म ज्ञान और दिव्य दृष्टि के आधार से होने वाली एक पूर्ण आध्यात्मिक प्रक्रिया होती है । परावाणी के शब्द स्वयं ही घटनाओं में परिवर्तित हो जाते हैं । अब प्रश्न यह है कि यह कार्य कैसे किया जाएगा तो बाबा जी ने उनको बताया कि भगवान कृष्ण , जो कि जनमानस को दिखते नहीं है पर निरंतर हैं और निरंतर रहेंगे , उनकी ही यह एक रणनीति है कि जब भी किसी देश की व्यवस्था को कमजोर करना हो , गिराना हो तो उसकी आर्थिक सत्ता को बहुत कमजोर कर दिया जाता है । आर्थिक सत्ता कमजोर होने से उस देश की राजनेतिक व्यवस्था का विनाश ही हो जाता है । भगवान कृष्ण या तो स्वयं अवतरित होकर या महायोगियों के अंतकरण में स्थापित हो कर इन महान कार्यों को करवाते हैं । बाबाजी ने बताया कि उनके सदगुरुदेव ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबाजी जो की पूर्ण रूपेण कृष्णमय हैं , अपने सूक्ष्म शरीर के द्वारा अपने इन संकल्पों को निश्चित ही फलीभूत करेंगे । बाबाजी के शिष्यों को यह सर्वविदित है कि परमपूजनीय देवरहा बाबा जी अपने सर्वोत्तम पूर्ण शरणागत शिष्य और अपने आप में ही एक सिद्ध महायोगी ब्रह्म वेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा जी के अंतकरण में स्थापित हो कर , इन सब कार्यों का संचालन कर रहे हैं ।

पापी व्यवस्थाएं अपने आप नष्ट नहीं होती है , उनको नष्ट करने का कारण दैवीय शक्तियों के द्वारा बनाया जाता है । चीन के द्वारा दक्षिण चीन समुद्र में एक कृत्रिम टापू बनाकर अपनी सैन्य शक्ति को वहां स्थापित करके कई और देशों के संसाधनों को प्रयोग करने के अधिकारों का हनन करना और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के आदेश को ना मानना एक ऐसा ही कारण था । पर वर्तमान में जैविक हथियार को प्रयोग करके पूरे विश्व की आर्थिक व्यवस्था को बर्बाद करके अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए , चीन ने जो कार्य किया है ( जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और यूरोपीय देशों का संदेह और मानना है ) अब वैश्विक व्यवस्थाओं में मुलचूल परिवर्तन का बहुत बड़ा और अंतिम कारण बन चुका है । हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है यह इस जगत का सिद्धांत है । यह एक आध्यात्मिक नियम भी है जिसके अन्तर्गत जो जैसा करता है वैसा ही भरता भी है । माओट्सेतुंग का कहना कि शक्ति और सत्ता बंदूक की नली से निकलती है , थोड़े ही समय में गलत साबित हो जाएगा । सनातन धर्म के अनुसार सारी शक्ति और सत्ता भगवान कृष्ण के श्रीचरणों से निकलती है और मनुष्य इस को प्रेम , शरणागति और प्रार्थना के द्वारा ही अपने और जनकल्याण हेतु इस अनंत अमोघ शक्ति का एक अंश पा सकते हैं । परिवर्तन अपने साथ कुछ ना कुछ विनाश अवश्य ले कर आता है । बाबाजी ने श्री मोहन भागवत जी को स्पष्ट बताया कि अखंड भारत का उदय और सनातन धर्म का विश्वव्यापी होना अवश्यंभावी है और वर्तमान में भारत पर अनेक संकट होने के बाद भी , भारत का भविष्य बहुत उज्जवल है ।
यह भारत के वर्तमान इतिहास ( contemporary history ) मैं होने वाली एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक घटना है । कुछ लोगों ने ऐसा सोचा है कि बाबाजी एक राजनैतिक दल को ही क्यों आशीर्वाद देते हैं । बाबाजी कहते हैं कि बाबा का एक ही दल है और वोह भारत दल है । बाबाजी , और उनका आश्रम किसी से भेद भाव नहीं करता और बाबाजी तो हमेशा यही कहते हैं कि विषमता को हटा कर समता को लाना है और भारत को अखंड बनाना है और यही उपदेश बाबाजी ने दिया कि तोड़ने वाली शक्तियों को हटाना है और सबको जोड़कर भारत को अखंड बनाना है । बाबाजी अखंड भारत के उदय और सनातन धर्म के विश्वव्यापी होने के लिए कृत्संकल्प है क्योंकि विश्व शांति की स्थापना इसी के द्वारा होनी है । क्योंकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की घोषित सोच सनातन धर्म के उत्थान की है , इसलिए समय और आशीर्वाद , प्राकृतिक और स्वाभाविक रूप से उनके साथ है । अगर बाकी सारे दल भी इस विचारधारा को साथ लेकर चलें और सनातन धर्म के कार्यों को करने में एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें तो भारत के अच्छे दिन और शीघ्र आ सकते हैं । संघ परिवार सनातन धर्म के लिए कब , क्या और कितना करता है , यह एक डिबेट का विषय हो सकता है पर यह एक महान देशभक्त लोगो कि संस्था है जो कि सनातन धर्म और विश्व शांति के लिए निरंतर ही अच्छा कार्य कर रहे हैं । और यह लोग जानते हैं कि महान संतों के आशीर्वाद से इनके संकल्पों और कार्यों मे सफलता मिलती है इसीलिए मार्गदर्शन , दिशनिर्देश और आशीर्वाद के लिए बाबाजी के पास आते हैं और इसके बहुत बड़े सुपात्र हैं ।
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