गोपाष्टमी पर्व 22/11/2020

लाखों वर्ष पहले दानव , दैत्य , असुर और दुष्ट राजाओं के भार से पीड़ित पृथ्वी गौ का रूप धारण करके ब्रह्मा जी की शरण में गई । ब्रह्मा जी उनको भगवान शंकर के साथ में लेकर भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम में ले गए । वहां पर विष्णु जी ने उन्हें बताया कि साक्षात भगवान श्री कृष्ण ही अनगिनत ब्रह्मांडो के स्वामी है , और उन्हीं की कृपा से पृथ्वी पर दुष्टों के द्वारा जो असहनीय भार बनाया जाता है , उसको कम किया जा सकता है । भगवान कृष्ण को परिपूर्णतम अवतार माना गया है वह गोलोक धाम में रहते हैं । ब्रह्मा जी एवं सभी देवता गोलोकधाम में स्थित विरजा नदी के तट की शोभा को देखते हुए अचंभित रह गए क्योंकि उस नदी के अंदर अनगिनत ब्रह्मांड तैर रहे थे । इसीलिए भगवान कृष्ण को अनंतकोटी ब्रह्मांड नायक भी कहा जाता है । ब्रह्मांड अनेक और अनगिनत अनंत है पर गोलोकधाम केवल एक ही है जहां पर काल का कोई वश नहीं है , मृत्यु , रोग और माया अपना प्रभाव बिल्कुल नहीं डाल सकती और कोई विकार वहां प्रवेश कर ही नहीं सकता और जहां भगवान कृष्ण अपने साकार निज स्वरूप में रहते हैं । गोलोक धाम यहां से करोड़ों योजन दूर है (, एक योजन में लगभग 12 किलोमीटर होते हैं ) । गोलोक धाम हमारे शास्त्रों में वर्णित है । यह काल्पनिक नहीं है और यह बिल्कुल सत्य है । मृत्यु लोक , जहां पर हम लोग रहते हैं , उसके सामने बहुत ही नगण्य और शून्य के समान है । गोलोक धाम की चर्चा हमारे ऋषि-मुनियों ने सनातन धर्म के शास्त्रों में की है । वहां पर द्वार द्वार पर अनेक सुंदर गायों के दर्शन होते हैं और यह दिव्य आभूषणों से विभूषित होती है और सब दूध देने वाली है , सुशील स्वरूपा और सद्गुणी है । भव्य रूप वाली गाएं वहां सब ओर विचरण करती है और स्वर्ण के आभूषणों से युक्त होती हैं । दूध देने में समुद्र की तरह गौलोक की दिव्य गायों की तुलना पृथ्वीलोक की गाय से नहीं की जा सकती । पृथ्वी पर तो गायों का आजकल घोर अपमान हो रहा है । भगवान कृष्ण से जब गौ रुप में पृथ्वी ने प्रार्थना करी तो भगवान कृष्ण ने धरती पर सनातन धर्म, गौ , साधु , सज्जन लोगों की रक्षा के लिए अवतरित हो कर आने को स्वीकार किया । भगवान कृष्ण ने महाभारत में अनेकों दैत्यों और दुष्ट राजाओं को मारकर मृत्युलोक में धर्म की स्थापना की । वर्तमान में भगवान कृष्ण दृश्य नहीं है पर वह धर्म की पुनर्स्थापना के लिए महायोगियों के हृदय में स्थित हो कर उन्ही सब कार्यों को करेंगे जो कि आज से ५२५० वर्ष पूर्व उन्होंने किए थे । मलेच्छा चीन और मानवता के अनेक अन्य शत्रुओं का विनाश होना आवश्यक है और होना निश्चित है । अखंड भारत का उदय , सनातन धर्म का विश्व व्यापी होना , कैलाश मानसरोवर का भारत में आना , विश्व शांति की स्थापना होना इत्यादि यह सब ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा जी के सत्य संकल्प है , जो शीघ्र ही पूरे हो कर रहेंगे ।
गोपाष्टमी के दिन ही गायों का मृत्यु लोक में मानव कल्याण के लिए गौलोक से अवतरण हुए था । आज गोपाष्टमी है और इन महत्वपूर्ण पर्वो पर महायोगियों के सत्य संकल्पों की पुष्टि होती है। बाबाजी के सारे आश्रमों में आज गौ पूजन आयोजित किया गया । यह एक महान दान , ध्यान और प्रार्थना का पर्व है ।

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