बाबाजी का विशेष जुड़ाव और लगाव भारत और भारत बासियों से इसलिए है क्योंकि भारतवर्ष भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम की अपनी जन्मभूमि और कर्म भूमि है । महायोगी का भगवान के साथ में अमर और पूर्ण एकीकरण के द्वारा ऐसे महान संतों का प्रकृति एवं उसके पांचों तत्वों_ आकाश , वायु , जल , अग्नि एवं पृथ्वी के ऊपर पूरा नियंत्रण हो जाता है । लेखक ने एवं बाबाजी के अन्य शिष्यों ने इस प्रकार की यौगिक क्रियाओं का प्रकृति के ऊपर परिवर्तन होते हुए देखा और अनुभव किया है । बाबाजी कहते हैं कि वह स्वयं कुछ नहीं करते और यह सारा कार्य भगवान कृष्ण के द्वारा ही किया जाता है । भगवान कृष्ण अदृष्य हैं और बाबा दृश्य है इसलिए उनके भक्त ऐसा समझते हैं कि यह कार्य बाबाजी के द्वारा किया जाता है। बाबाजी कहते हैं कि आध्यात्मिक जगत और उसकी पूर्ण शक्तियों को केवल सदगुरु की भक्ति , निष्काम गौसेवा और निष्काम कृष्ण प्रेम और पूर्ण शरणागति के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है । बाबाजी के सदगुरु ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबा हैं जिनकी आयु आंकी नहीं जा सकती है। देवरहा बाबाजी ने हंस बाबाजी को अपने विंध्याचल आश्रम में रहने वाली गायों की सेवा के लिए नियुक्त किया था । बाबाजी गौसेवा को पिछले कई दशकों से निरंतर करते आ रहे हैं । जब देवरहा बाबाजी ने जून १९९० में अपना शरीर त्याग दिया था उस समय विंध्याचल आश्रम में १५० गाएं थीं , आज उनकी संख्या बढ़कर लगभग ५००० हो गई है । बाबाजी उन सभी राजनेताओं को जो उनके दर्शन में आते हैं यही उपदेश देते हैं कि जबतक गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लग जाता एवं अयोध्या रामजन्म भूमि पर एक भव्य राममंदिर नहीं बन जाता तब तक देश में शांति और विकास होना अत्यंत कठिन है । श्री अशोक सिंघल एवं श्री मोहन भागवत जी जब भी बाबाजी के दर्शन में आए बाबाजी ने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया की राम मंदिर का निर्माण उनके सदगुरु ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबाजी के संकल्प के अनुसार सर्वसम्मति से , शांतिपूर्वक और कानून के द्वारा होना है । जब श्री अशोक सिंघल जी बाबाजी के दर्शन में नबंबर २०१३ में आए थे तब उन्होंने भाजपा और श्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लाने के लिए बाबाजी से प्रार्थना की थी बाबाजी ने उनको आशीर्वाद देते हुए कहा कि अखंड भारत के उदय और राममंदिर के निर्माण जैसे बड़े कार्यों के लिए आध्यात्मिक शक्तिओं ने यह निर्णय लिया कि भाजपा को विजय दिलवाई जाएगी। लेखक ने उसी समय श्री अशोक सिंघल को भाजपा और नरेंद्र मोदी के जीतने की अग्रिम बधाई दी थी । बाबाजी के भक्तों ने बाबाजी की भविष्यवाणियों को सत्य होते हुए हज़ारों बार देखा है , यह भविष्यवाणी चाहे भारत या विश्व या भारत की राजनीतिक प्रणाली या आर्थिक व्यवस्था के बारे में हो या व्यक्ति विशेष या प्रांतों या परिवारों के बारे में हो , बह हमेशा ही सत्य हुई है । इन भविष्यवाणियों में एक गुप्त अध्यात्मिक ऊर्जा एवं प्रक्रिया जो घटनाओं को बदलने के लिए की जाती है बह भी छुपी रहती है। देवरहा बाबाजी ने अपना स्थूल शरीर त्यागने से पूर्व घोषित किया था कि बह भारत की पवित्र भूमि को छोड़ कर कहीं जाने वाले नहीं हैं और बह अपने सूक्ष्म शरीर से भारत के कल्याण के लिए कार्यरत रहेंगे और भारत को हर बड़े संकट और ख़तरों से बचाएंगे । ब्रह्मवेत्ता श्री श्री देवरहा हंस बाबाजी बतातें है कि जैसा जैसा ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबा ने बताया था वैसा ही हो रहा है और भारत की रक्षा और विकास बाबाजी के द्वारा निरंतर किया का रहा है । यह सत्य है कि भारत कई तरह की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से ग्रस्त है परन्तु ऋषि सत्ता के निरंतर क्रियाशील होने के कारण भारत का उसके शत्रु कुछ भी नहीं बिगाड़ पाए है ना बिगाड़ सकते हैं ।
श्री देवरहा बाबा मंच और अखंड भारत निर्माण
महासिद्ध योगी , महायोगीसम्राट अध्यात्मतत्ववेत्ता
ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबाजी पिछली तीन सदियों के भारत के महानतम संत हुए हैं । अध्यात्म तत्व अदृश्य भगवत तत्व है जिससे भौतिक जगत की उत्पत्ति , संचालन और विनाश होता है । अध्यात्म तत्व को जानने वाले और धारण करने वाले महायोगी , त्रिकालदर्शी संत होते हैं जिनको भूत, वर्तमान और भविष्य का पूरा ज्ञान होता है । त्रिकालदर्शी महायोगी करुणा , दया और कृपा के अनंत और असीमित सागर होते है जो हर पल पूरे विश्व के कल्याण और शांति के लिए अनवरत रूप से कार्यरत रहते हैं । परमपूजनीय देवराहा बाबाजी का मुख्य लक्ष्य अखंड भारत का विश्व शांति और समृद्धि के लिए निर्माण करना था । उनके जीवनकाल में ऐसे अनेक वृतांत मिलते हैं जब उन्होंने भारत की रक्षा के लिए आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा हस्तक्षेप करवाके भारत की रक्षा की थी । १९६२ के भारत चीन युद्ध में , चीन ने भारत को धोका देकर भारत की लगभग ५०००० वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर लिया । इससे पहिले चीन ने १९५९ में तिब्बत को सैन्य शक्ति का प्रयोग करके हड़प लिया था जिसके कारण चीन भारत का पड़ोसी बन गया और भारत चीनी भाई भाई का नकली नारा देकर भारत को पूरी तरह भ्रमित करके अचानक आक्रमण करके हमारी भूमि को हड़प लिया । चीन और भूमि को हड़पने के लिए आगे बढ़ रहा था तब नेहरूजी ने अपने एक कैबिनेट मंत्री को पूजनीय देवरहा बाबा जी के पास अपनी प्रार्थना लेकर भेजा । बाबाजी को सारी स्थिति की जानकारी दी और बताया की भारत की सैन्य तैयारी ना होने के कारण और धोके के कारण , भारत बराबर हार रहा था जिसको उस समय सार्वजनिक नहीं किया जा सकता था । परमपूजनीय देवरहा बाबा जी ने नेहरूजी के मंत्री को आश्वस्त करके कहा कि मेरा आशीर्वाद है कि अब चीन आगे नहीं बढ़ पाएगा । अगले दिन युद्धस्थल की चीन के एरिया में महाभीषण हिमपात हुआ जिससे हजारों चीनी सैनिक दब कर मर गए और चीनी सेना अस्तव्यस्त हो गई । चीन ने उसी दिन घबडा कर एकतरफा युद्धबंदी की घोषणा कर दी । बाबाजी के आशीर्वाद के अनुसार चीन आगे बढ़ने में असफल हो गया । बाबाजी ने कोई सैन्य या आर्थिक या राजनीतिक उपाय तो किया नहीं था पर उनके आध्यात्मिक हस्तक्षेप के कारण प्रकृति ने प्रचंड हिमपात करवाकर एक ही दिन में भारत की रक्षा करवाई और चीन , भारत के लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को हड़प नहीं पाया । यह सब भारत की कूटनीति या सैन्य या आर्थिक शक्ति के कारण नहीं बल्कि आध्यात्मिक शक्तियों के बाबाजी द्वारा किए गए प्रचंड हस्तक्षेप के कारण हुआ । दुनिया इसे जाने या ना जाने , समझे या ना समझे , यह एक अज्ञात पर बिल्कुल सच्ची घटना थी । पिछले ५७ वर्षों में चीन भारत पर चाह कर भी ( जिसमें डोकलाम भी शामिल है ) आक्रमण नहीं कर पाया पर अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के ऊपर अपना अधिकार शब्दों के द्वारा जताता रहता है । ऐसा गुप्त और अज्ञात आध्यात्मिक हस्तक्षेप के कारण ही होता है हुआ हैं और होता रहेगा । परमपूजनीय देवरहा बाबा जी यह जानते थे कि भारत को अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के द्वारा कृतिम रूप से खंडित किया गया था और इसे भारत की आध्यात्मिक शक्तियों ने कभी स्वीकार नहीं किया । सत्य सनातन धर्म का प्रतिरूप भारत क्योंकि अधिक समय तक खंडित नहीं रह सकता , ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबाजी ने यह संकल्प लिया था कि अखंड भारत का
पुनर्निर्माण होगा , सत्य सनातन धर्म विश्वव्यापी होगा और भारत को दोबारा विश्वगुरु माना जाएगा । महायोगी का संकल्प भगवान का संकल्प होता है और देर सवेर हमेशा पूर्ण होता है । ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबा जी ने 19 जून 1990 में अपना शरीर छोड़ने से पहिले अपने कृपा पात्र और परमप्रिय शिष्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी और अनेकों शिष्यों को बताया था कि बोह भारत के ऊपर अनेक संकटों को आते हुए , अपनी अंतरंग दृष्टि से देख चुके है और इन संकटों को हटाकर अखंड भारत के निर्माण कराने के लिए वोह अपना स्थूल शरीर त्यागने के बाद भी सूक्ष्म शरीर से कार्यरत रहेंगे । ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबा अपने दर्शन और आशीर्वाद , भूमि से ८ से १० फिट ऊंची मचान से देते थे । वास्तव में देवरहा बाबा मंच भारत में आध्यात्मिक शक्तियों का मुख्यालय था और आज भी है जहां से भारत को अखंड बनाने की प्रक्रिया सतत रूप से चल रही है । परमपूजनीय देवरहा बाबा जी अक्सर बताते थे कि वोह ज्ञानगंज की सिद्ध संतों की टोली के सरदार हैं । ज्ञानगंज धरती और आकाश के बीच में स्तिथ एक परम गुप्त स्थान है जो की हिमालय में गोमुख से बहुत आगे और ऊपर और कैलाश मानसरोवर के पास स्तिथ है । ज्ञानगंज में हजारों वर्ष की आयु के महानतम सिद्ध संत शरीरी वा अशरीरी रूप से रहते हैं और सृष्टि के संचालन के कार्य मानव कल्याण के लिए करते रहते हैं । तिब्बती भाषा में ज्ञानगंज को शांग्रिला के नाम से जाना जाता है । कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि चीन के घोर नास्तिक राजा माओ त्से तुंग ने तिब्बत को इसलिए भी हड़पा था जिससे बोह ज्ञानगंज में प्रवेश करके अमरत्व को प्राप्त कर सके। पर भगवत तत्व से निर्माणित ज्ञानगंज में घोर नास्तिक ना कभी प्रवेश कर सकते हैं ना उस को जान सकते हैं । यह परम दिव्य स्थान केवल महासिद्ध योगियों के लिए ही है जहां के सम्राट परमसिद्ध महायोगीसम्राट ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबा हैं । यह सनातन धर्म का बहुत बड़ा केंद्र है जो सारे नास्तिक और गैर सनातनी पंथों और संप्रदायों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है ।
योगियों का कार्य केवल राजनेतिक और सैन्य सुरक्षा तक सीमित नहीं होता , भारत और विश्व के कल्याण के लिए बोह आर्थिक जगत में यौगिक क्रिया करके भारत के लिए समृद्धि और खुशहाली लेकर आते हैं । १९६६ में जब श्री जगजीवन राम , तत्कालीन कृषि मंत्री , बाबाजी के दर्शन में गए थे , जब देश में दुर्भिक्ष अकाल पड़ा हुआ था , तब बाबाजी ने उनके अंतर्मन को पढ कर उन्हें कहा था कि मेरा आशीर्वाद है कि अब भारत अन्न के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा और उसे विदेश से अन्न नहीं आयात करना पड़ेगा । १९६६ से अन्न क्रांति शुरू हुई और तब से अब तक भारत अन्न में आत्मनिर्भर बना हुआ है । इसी प्रकार से उनके प्रतिरूप ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा जी ने जुलाई २०१४ में स्पष्ट संकल्प , आशीर्वाद और घोषणा की थी की तेल के दामों में भारी गिरावट आएगी । एक महीने के अंदर पेट्रोलियम तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम आधे से भी नीचे गिर गए और जबकि इससे भारत को अब तक लगभग २० लाख करोड़ रुपए की बचत हुई , आतंकवादी संगठनों की अर्थ व्यवस्था जोकि तेल निर्यातक देशों से किसी तरह चलाई जाती थी , वोह चरमरा गई । आतंकवादी संगठनों की आर्थिक व्यवस्था उजड़ने से आतंकवादी घटनाओं में बहुत कमी आई । इसी प्रकार ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी ने भारत में बड़े नोटों की बंदी की भविष्यवाणी दीपावली २०१६ के समय करी थी और यह गोपाष्टमी २०१६ तक हो गया । नोट बंदी होने से जाली करेंसी समाप्त हुई और पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो गई । इन यौगिक क्रियाओं को लेखक और अन्य कई लोगों ने अपने सामने होते देखा है और इस पर पहिले भी बहुत लेख लिखें हैं । इस तरह के यौगिक हस्तक्षेप भारत और विश्व कल्याण के लिए ही होते हैं और एकदम सटीक होते हैं । आज पाकिस्तान अपनी आर्थिक बर्बादी के कारण खंडहर बन चुका है और इसके खंडित होने में बहुत समय शेष नहीं है।
परमपूजनीय देवरहा बाबा जी , अपना स्थूल शरीर जून १९९० में वृंदावन में त्यागने के बाद अपने सूक्ष्म शरीर और अमर आत्मा को अपने परमकृपा पात्र और अपने अंतरंग स्वरूप और प्रतिरूप अपने परमप्रिय शिष्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबा की परमपवित्र काया में स्थापित करके , अपने सारे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पूरी आध्यात्मिक शक्ति के साथ कार्यरत हैं । देवरहा बाबा मंच का संचालन आज भी देवरहा बाबाजी अपने सूक्ष्म शरीर को ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी की काया में स्थापित कर के अपनी अमोघ शक्ति के द्वारा अखंड भारत के निर्माण , सनातन धर्म के वैश्वीकरण और भारत को आध्यात्मिक विश्वगुरु स्वीकार करवाने के लिए कर रहें हैं । लेखक और अन्य बहुत लोगों ने ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी की पिछले तीन वर्षों से निरंतर चल रही भविष्यवाणियों, प्रार्थनाओं , अखंड भारत के संकल्प और शंखनाद को बहुत करीब से निरंतर देखा है और सुना है । बाबाजी के शब्दों को घटनाओं में परिवर्तित होते हुए हजारों बार देखा है और अनुभव किया है । यह प्रक्रिया सतत रूप से चल रही है और इसका भविष्य में संकल्प के अनुसार पूरा होना अवश्यंभावी है ।
ब्रह्म वेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी का सत्य संकल्प , आशीर्वाद और भविष्यवाणी है कि सनातन धर्म का उत्थान और वैश्वीकरण होगा , अखंड भारत का उदय होगा , भारत का पूरे विश्व में सम्मान होगा और सभी देश भारत को आध्यात्मिक महाशक्ति और विश्वगुरु के रूप में स्वीकार करेंगे । पिछले तीन वर्षों से बाबाजी ने लगभग प्रतिदिन भगवान कृष्ण , ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबाजी से प्रार्थना की है और अपने शिष्यों से सामूहिक रूप से करवाई है जिससे सनातन धर्म का उत्थान और वैश्वीकरण हो और अखंड भारत का शीघ्र उदय हो ।
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