ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबा जी गौ को भारत की आत्मा मानते हैं । गौसेवा के लिए किए हुए दान को सर्वोत्तम सात्विक दान माना जाता है । भारत और भारतवासियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए गौसेवा करना परम आवश्यक है । हर व्यक्ति को शास्त्रों के अनुसार अपनी आय का दसवां हिस्सा ( विष्णु अंश ) मानव समाज और विश्व कल्याण के लिए और अपने स्वयं और अपने परिवार के कल्याण के लिए अवश्य ही दान करना चाहिए और इस अंश को घर में अधिक समय तक कभी नहीं रखना चाहिए । दान की परंपरा पिछले दो हजार वर्षों में भारत में यवनों और मलेच्छों के शासन होने के कारण बहुत कमजोर हुई है । परमपूजनीय ब्रह्मर्षि श्री देवरहा बाबा जी ने अनेकों बार कहा था कि जब तक भारत में गौहत्या बंद नहीं होती और गौ माता भारत में सुखी नहीं रहती , भारत में शांति और समृद्धि का होना बहुत कठिन है । ब्रह्मवेत्ता श्री देवरहा हंस बाबाजी कहते हैं कि गौ और गोपाल में कोई भेद नहीं है और गौसेवा सीधी भगवान कृष्ण की ही सेवा है । बाबाजी गौसेवा को सामाजिक परमार्थ और व्यक्तिगत स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए सबसे बड़ा साधन मानते हैं । अखंड भारत के निर्माण के लिए और सनातन धर्म को विश्वव्यापी बनाने के लिए महायोगियों के संकल्प और आशीर्वाद के साथ , गौसेवा को करना और करवाना परम आवश्यक है । राष्ट्र निर्माण के लिए गौसेवा एक परम शक्तिशाली और प्रभावशाली रणनीति है । हालांकि सेक्युलर सरकारें और उनके द्वारा चलाए जा रहे पाठ्यक्रम में इस की चर्चा नहीं मिलती है पर सनातन धर्म के हर शास्त्र में गौसेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है । महायोगियों के उपदेश और सतत शिक्षा के अनुसार निरंतर गौसेवा व्यक्तियों के अपने और अपने परिवार के निजी कल्याण के लिए परम आवश्यक है । गौ का पृथ्वी पर आगमन ही इसीलिए हुआ है कि हर मनुष्य गौ की यथायोग्य सेवा कर के अपने जीवन के चारों पुरुषार्थों _ धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष _ को प्राप्त कर सके । महायोगियों के द्वारा गऊशालाओं का संचालन मानव कल्याण के लिए ही किया जाता है और गौसेवा के लिए जो कोई भी दान करता है वोह गौ के ऊपर कोई उपकार नहीं करता बल्कि अपने लिए ही चारों पुरुषार्थों_ धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष _ को प्राप्त करने का ही साधन करता है । गौसेवा , गौसंरक्षण और गौसंवर्धन के लिए आवश्यक है और यह अखंड भारत के निर्माण और सनातन धर्म के उत्थान और वैश्वीकरण के लिए आवश्यक है । अखंड भारत के उदय और सनातन धर्म के वैश्वीकरण के द्वारा ही विश्व शांति और विश्व मंगल संभव हो सकेगा । इसी के द्वारा दुष्टों का नाश हो सकेगा और उनके द्वारा प्रयोग किए जा रहे जैविक हथियारों को निष्प्रभावी करने में मदद मिलेगी ।
बाबाजी के विंध्याचल स्तिथ आश्रम में लगभग 3000 गाएं हैं और वृंदावन गौशाला में लगभग 300 गाएं है । हर वर्ष मार्च , अप्रैल में गेंहू इत्यादि के भूसे को वार्षिक खपत के लिए बाजार से खरीदा जाता है और सर्वाधिक राशि की आवश्यकता इसी समय होती है ।
विश्वमंगलकारिनी गौमाता की सेवा करने के लिए दान की राशि निम्नलिखित खाते में इंटरनेट या चेक इत्यादि के द्वारा की जा सकती है और दान की राशि भारत के इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80G के अन्तर्गत कवर्ड है ।दान राशि की सूचना निम्नलिखित ईमेल आईडी या व्हाट्स एप बॉक्स ( 9999535099 ) में देने की कृपा करें ।
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