ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबाजी ने बताया कि उनके सद्गुरु ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबाजी अपने अत्यंत शक्तिशाली संकल्प को पूरा करने के लिए आज भी सूक्ष्म रूप से अपनी महाप्रचन्ड आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ निरंतर कार्यरत हैं । देवराहा बाबाजी ने अपना जून 1990 में शरीर छोड्ने से पहिले कई बार बताया था कि वह भारत एवं विश्व के ऊपर भयंकर विपत्तियों के बादल देख चुके हैं और उन्होंने यह संकल्प किया था कि भारत जो कि भगवान राम एवं कृष्ण की भूमि है , उसकी रक्षा एवं अखंड भारत के एवं सनातन धर्म के वैश्वीकरण के लिए वह निरंतर कार्य करते रहेंगे क्योंकि इसी के द्वारा विश्व में शांति एवं समृद्धि की स्थापना हो सकती है । ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबाजी जो कि भगवान कृष्ण के अंतरंग स्वरूप हैं एवं भगवान कृष्ण की अध्यात्मिक शक्ति से युक्त हैं , इस कार्य को पूर्ण अवश्य ही करेंगे । देवराहा बाबाजी अपने परमप्रिय शिष्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा , जो अपने आप में एक त्रिकालदर्शी महायोगी हैं , के हृदय में बैठकर रह कर अखंड भारत के निर्माण के लिए पूर्णरुपेण कार्यरत हैं । अखंड भारत का निर्माण किसी मानवीय शक्ति या राजनीतिक क्रिया के द्वारा कदापि संभव नहीं है । इस कार्य को ब्रह्मऋषी देवराहा बाबाजी भगवान कृष्ण की अमोघ शक्ति का प्रयोग करते हुए ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबाजी के द्वारा संपादन करवा रहें हैं ।भगवान कृष्ण , ब्रह्मऋषी श्री देवराहा बाबा एवं ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा , उस अदृष्य जगत के स्वामी हैं जो दृश्य जगत को संचालित करता है । इसलिए ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा का अखंड भारत का उदय एवं सनातन धर्म का विश्वव्यापी होने की भविष्यवाणी एवं संकल्प निश्चित रूप से फलित होगी एवं पूर्ण होगी । बाबाजी अपनी परावाणी में अपने संकल्प को निरंतर दोहराते हैं जिससे परावाणी के शक्तिशाली शब्द बृह्मांड में गूंज कर अपने आप को अखंड भारत के concrete shape में परिवर्तित कर लें । बाबाजी इस कार्य को मूर्त रूप देने के लिए सर्वाधिक महत्व भगवान कृष्ण , देवराहा बाबा की प्रार्थना को देते हैं और इसीलिए प्रतिदिन हर पल भगवान कृष्ण एवं देवराहा बाबा की अर्चना एवं प्रार्थना सब से कराने के बाद अखंड भारत का जयघोष नित्य करवाते हैं । बाबाजी बिल्कुल स्पष्ट वाणी में कहते हैं कि विश्व के सभी राष्ट्रों को और उनके राष्ट्राध्यक्षों को यह स्वीकार करना ही होगा कि अखंड भारत का उदय होने अवश्यम्भावी है एवं भारत विश्व का महा आध्यात्मिक विश्वगुरु है और रहेगा ।
ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा कहते हैं कि कृष्णा नाम संकीर्तन से भारत के अंदर जाति , धर्म ,भाषा इत्यादि के नाम पर फैली हुईं घातक विषमताओं को हटाकर समता को लेकर आने में बहुत मदद मिलेगी । यह हम सब जान चुके हैं कि राजनेता तोड़ने का कार्य जाने अनजाने में करते हैं जबकि संत हमेशा समाज को जोड़ते हैं । महान संतों के कार्य एवं वचन पूरी मनुष्यजाति के लिए कल्याणकारी होते हैं ।
बाबाजी अपने अखंड भारत के संकल्प , भविष्यवाणी एवं जयघोष को अपने भारत स्तिथ विंदयाचल, वृन्दाबन , ऋषिकेश ,पटना , रांची ,दिल्ली इत्यादि आश्रमों में पिछले एक साल में कई बार दोहरा चुके हैं । यह एक सतत प्रक्रिया है जिसके द्वारा अखंड भारत का निर्माण एवं उदय अवश्य होगा । इसके लिए बाबाजी जैसे त्रिकालदर्शी महायोगी को किसी भीड़तंत्र या मीडिया रिपोर्टिंग की आवश्यकता नहीं होती यह आध्यात्मिक प्रक्रिया हैं जिस को पूरा करने के भगवान कृष्ण की अमोघ शक्ति ,सत्य संकल्प एवं पूर्ण विश्व के कल्याण की भावना ही पर्याप्त है ।
बाबाजी के लगभग 8 दिन के रांची प्रवास के दौरान उनके दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए बहुत से मंत्री , न्यायाधीश, राजनेता ,वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वकील ,उद्योगपति ,बिल्डर्स ,अध्यापक ,एवं समाज के हर वर्ग के लोग के कई बार आए ।
अतुल कुमार सक्सेना
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