देवराहा तत्व के द्वारा राम मंदिर निर्माण

श्री मोहन भागवत Date-22/11/2018
सरसंघचालक ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय आरएसएस
नागपुर , महाराष्ट्र
विषय – #रामजन्मभूमि #अयोध्या में भगवानराम का मंदिर कानून के द्वारा बनाने का संकल्प पूरा करने के बारे में ।

आदरणीय श्री भागवत जी ,

ब्रह्मर्षिश्रीदेवराहाबाबाजी ने 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री #श्रीराजीवगांधी को स्पष्ट बताया था कि विवादित स्थल में जहां #रामलला की मूर्ति विराजमान है वही भगवान राम का प्राकट्य / जन्म स्थान है उन्होंने #राजीवगांधी को निर्देशित किया था कि उनको ताला खोल कर वहां पर तुरंत पूजा अर्चना शुरू करके भव्य मंदिर का निर्माण करवाना चाहिए । #राजीवगांधी ने ताला खुलवाकर #रामलला को मुक्त तो कराया पर इससे आगे कोई प्रगति नहीं हो पाई । राजीव गांधी ने बाबाजी से यह पूछा था कि कोई मनुष्य इस संसार में आज प्रामाणिक तौर पर यह नहीं बता सकता कि भगवान राम का प्राकट्य स्थल कहाँ है पर क्योंकि बाबाजी एक त्रिकालदर्शी महायोगी है इसलिए उनको यह अवश्य पता होगा । बाबाजी ने #राजीवगांधी को न केवल जन्मस्थान के बारे में उत्तर दिया बल्कि उन्हें निर्दर्शित किया कि इस स्थान पर सरकार को मंदिर बनवाने में पूर्ण सहयोग करना चाहिए । महापुरुष इस बात को भलीभांति जानते है कि कौन क्या और कितना कर सकता है पर फिर भी उपदेश अवश्य करते हैं । राजीव गांधी ने इस विषय में इतना योगदान तो किया कि भगवान रामलला को ताला खुलवाकर मुक्त तो कराया । श्री नारायण दत्त तिवारी तत्कालीन मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश एवं श्री बूटा सिंह तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजीव गांधी के साथ थे । बाकी कार्य होना शेष था इसलिए रामजन्मभूमि आंदोलन चलता रहा ।

श्रीदेवराहाबाबाजी ने 1989 के प्रयाग कुम्भ मेले में यह घोषणा की थी कि अयोध्या में विवादित भूमि ही भगवान राम का जन्मस्थान है और राम मंदिर का निर्माण उसी स्थल पर होना चाहिये ।

बाबाजी ने ऐसा कहा था कि #विश्वहिन्दूपरिषद उनकी आत्मा है और उनकी गतिविधियों बाबाजी की प्रेरणा से ही कार्यान्वित होती है । बाबाजी ने स्पष्ट घोषणा और भविष्यवाणी की थी कि राम मंदिर इसी स्थल पर सर्वसम्मति से कानून के द्वारा निर्माणित होगा । बाबाजी ने विहिप के लोगों को यह भी बताया था कि भविष्य में विवादित इमारत हट जाएगी और इसी स्थल पर भव्य मंदिर भवन बनेगा । बाबाजी कोई राजनीतिक नेता नहीं थे और न ही किसी दल या संस्था के सदस्य या अध्यक्ष थे , बल्कि एक अत्यंत प्रभावशाली त्रिकालदर्शी महायोगी थे जिन्होंने भविष्य को पहिले से देखकर भविष्यवाणी की थी । कब होगा , किसके द्वारा होगा ,कैसे होगा यह सब नहीं बताया था । बाबाजी ने अपना स्थूल शरीर 19 जून 1990 में बृंदाबन में त्याग दिया । उसके लगभग ढाई वर्ष बाद 6 दिसम्बर 1992 पर कारसेवकों के आंदोलन में विवादित ढांचा गिर गया । बाबाजी ने जैसा बोला था वैसा ही हुआ । किसी इन्क्वारी कमीशन ने अन्य लोगों के अतिरिक्त इस घटना के लिए पूजनीय देवराहा बाबा को 2009 में अपनी रिपोर्ट में दोषी बताया । उनका नाम इस रिपोर्ट में डालने का विरोध उनकी कृपाप्राप्त कांग्रेस पार्टी ने भी नहीं किया । #श्रीराजनाथसिंह ने #पार्लियामेंट की बहस में यह बताया कि #देवराहाबाबा अपना शरीर 1990 में छोड़ चुके थे जबकि ढांचा ढाई साल बाद दिसम्बर 1992 में गिरा तब ऐसी स्तिथि में लिबरहान कमीशन को बाबा का नाम आरोपियों की सूची में डालना सही नहीं था । राजनाथ सिंह जी ने यह भी बताया कि कांग्रेस पार्टी के सारे प्रधानमंत्री बाबा से आशीर्वाद प्राप्त थे फ़िर भी कांग्रेस ने बाबाजी को अपमानित करने वाली रिपोर्ट का खंडन या विरोध नहीं किया । कांग्रेस की इतने महान संत की निंदा और अपमानित करने वाली रिपोर्ट का खंडन न करके अपनी कृतघ्नता का सबूत देश को दिखा दिया और अपनी कृतघ्नता के कारण अपने नाश को यह लोग आज देख रहे हैं ।
ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबाजी ने अपना स्थूल भौतिक शरीर छोड़ने से पहिले कई बार बताया था कि वोह अपने सूक्ष्म शरीर से भारत के उज्जवल भविष्य के लिए निरंतर कार्यरत रहेंगे । उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि #अखंडभारत के उदय , #सनातनधर्म के उत्थान के लिए निरंतर कार्य होता रहेगा । बाबाजी ने कहा था कि वोह विश्व के हैं और विश्व उनका हैं ।

ब्रह्मवेत्ताश्रीदेवराहाहंसबाबाजी , जो कि ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबा के अंतरंग स्वरूप एवं आध्यात्मिक उत्तराधिकारी है , ने दिसंबर 1992 के शुरू में अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर अपने शिष्यों को बताया था की शीघ्र ही यहां मंदिर शुरू होते हुए भगवान राम की पूजा अर्चना विधिवत आरम्भ हो जाएगी । यहां यह बताना आवश्यक होगा कि हंस बाबा के पास विहीप और #आरएसएस या #बीजेपी के लोग / नेता 1993 AD तक इस विषय पर चर्चा या आशीर्वाद के लिए नहीं आते थे । #हंसबाबाजी ने अपनी #रामजन्मभूमिविषयकपरावाणी में स्पष्ट कहा है कि यह स्थान भगवान राम की जन्म भूमि है और भगवान राम का भव्य मंदिर यहां लाख़ों सालों से त्रेता युग से चले आ रहा है । विवादित ढांचा गिर गया और विवाद को समाप्त करने के लिए बाबाजी ने अपनी परावाणी में यह भी स्पष्ट बताया है कि इस स्थल के नीचे जा कर उन्होंने मंदिर होने का पूरा प्रमाण अपनी दिव्य दृष्टि से देख लिया है और मानव समाज इसकी खुदाई करवा कर प्रमाण को प्रत्यक्ष देख सकता है । हाई कोर्ट प्रयाग ने निर्णय लिया कि पुरातत्व विभाग इस स्थान की खुदाई करके देखे कि वहाँ पर मंदिर / उसके अवशेष इत्यादि मिलते हैं या नहीं । पुरातत्व विभाग ने इससे पहिले कुछ कार्य किया था पर उसमें कोई कानूनी शक्ति न होने के कारण किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया । किसी आध्यात्मिक शक्ति से प्रेरणा पाकर हाई कोर्ट प्रयाग ने इस विचार का ठोस कार्यान्वन किया और न्यायालय का आदेश होने के कारण पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट को क़ानूनी वैधता पहली बार मिली । बाबाजी के शिष्य इस को मानते है कि बाबाजी की गुप्त प्रेरणा से ही प्रेरित होकर हाई कोर्ट प्रयाग ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया हालांकि यह जज लोग यह नहीं जानते होंगे कि यह विचार उनके मन में कैसे आया । इसकी प्रेरणा भगवान राम एवं उनके अभिन्न अंग त्रिकालदर्शी महायोगी के द्वारा बिल्कुल गुप्त रूप से होती है । इस घटना के बाद #श्रीसिंघल को बाबाजी के महायोगी संत होने का विश्वास पूर्णरूपेण हो गया । #श्रीसिंघल ने मुझे बताया की रामजन्म भूमि के विषय पर वो #देवराहाबाबाजी से हर कदम पर दिशानिर्देश लेते थे पर बाबाजी के 1990 में शरीर छोड़ने के बाद बोह इस विषय पर अनाथ जैसे हो गए । मैंने उनसे कहा कि योगी कोई शरीर नहीं होते और बोह आज भी आपको गाइड कर रहे हैं । श्री सिंघल बोले कि उन ने सुना है कि बाबाजी ने शरीर छोड़ने के बाद तिब्बत के पास कहीं जन्म ले लिया है । मैंने उन्हें बताया कि यह सत्य नहीं है क्योंकि बाबाजी ने स्वयं यह बताया था कि स्थूल शरीर छोड़ने के बाद वोह सूक्षम शरीर से भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्यरत रहेंगे । मैंने उन्हें बताया कि देवराहा बाबाजी की आत्मा और सूक्ष्म शरीर देवराहा हंस बाबाजी की अंतर्मन में स्थापित होकर अखंड भारत , राम मंदिर इत्यादि लक्ष्यों के लिए निरंतर कार्यरत है । मैंने उन्हें बताया कि यह सब न केवल हंस बाबा की परावाणी में वर्णित है , हम लोगों ने भी इस बात का अनुभव किया है । इसलिए देवराहा बाबा एवं हंस बाबाजी में कोई भेद नहीं है और आप उनसे हर आवश्यक कार्य के लिए आशीर्वाद एवं दिशानिर्देश ले सकते है । । हालांकि इस बात से की हंस बाबा को कौन क्या समझता है , कोई फर्क नहीं पड़ता ,सिंघल जी को बाबाजी की असीम भगवतीय शक्तियों के बारे में पूर्ण विश्वास था । राममंदिर विषयक परावाणी को 1995 के बाद के सारे कुम्भ मेलों में , विहिप ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी की कई बैठकों में कई बार वितरण किया गया । यद्यपि बाबा की परावाणी देवनागरी लिपी में है इसके शब्दो को सूत्रबद्ध होने के कारण यह लोग भी इसको पूरी तरह समझ नहीं पाए । पर दिव्य परावाणी और उसके शब्द समाज और उसके सामूहिक अंतर्मन पर गुप्त रूप से कार्य करते हुए वातावरण को अनुकूल बनाने का कार्य गुप्त रूप से करते हैं । कोई इसे समझे या न समझे शब्दों में निहित आध्यात्मिक ऊर्जा समाज के कल्याण के लिए कार्य करती रहती है । विहिप के पटना में 05/12/2010 में आयोजित कार्यक्रम में उनके मंच से श्री अशोक सिंघल की उपस्थिति में बाबा के शिष्यों के द्वारा इस का सामूहिक गायन किया गया । मैंने स्वयं प्रयाग के 2013 के प्रयाग कुम्भ के मेले में विहिप के कैम्प में श्री प्रवीण तोगड़िया को इस ग्रंथिका को बाबा के आदेशानुसार उन्हें भेंट किया था ।उन्होंने मुझे पूछा कि इसमें क्या एक्शन प्लान है । मैंने उन्हें बताया कि इसको वोह स्वयं पढ़ कर समझे । महायोगी राजनेताओँ की तरह कोई एक्शन प्लान तो बनाते नहीं वोह तो सबसे अधिक निर्णायक आध्यात्मिक स्तर पर गुप्त रूप से कार्य करते हुए समाज एवं इसके राजनीतिक नेताओं एवं न्यायविदों को गुप्त रूप से प्रेरित करते हुए राम मंदिर जैसे अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्यों को शांतिपूर्ण तरीक़ों से कार्यान्वयन जनहित में करवाते है । इसमें समय अधिक लगता है पर कार्य शांतिपूर्वक सम्पन्न हो जाते है । इसी क्रम में जिस दिन ( 30/09/2010 ) प्रयाग हाई कोर्ट का रामजन्मभूमि पर निर्णय आने वाला था , श्री अशोक सिंघल ने मुझे फ़ोन करके बाबाजी का आशीर्वाद लेने के लिए बोला । मेरी बाबाजी से वार्ता हुई उन्होंने बताया कि कोर्ट का निर्णय रामजन्मभूमि के हित में भगवान राम की इच्छा अनुसार आएगा । मैंने श्री सिंघल को यह बात तुरंत सूचित कर दी । शाम को लगभग 6 बजे श्री सिंघल का मुझे फ़ोन आया और उन्होंने बहुत प्रसन्ता के साथ मुझे बताया कि बाबाजी की बात सच हो गयी है और निर्णय हमारे हित में ही आया है । इसके बाद पार्टियां सुप्रीम कोर्ट में चली गई और उनका निर्णय पिछले 8 साल से लंबित है । इस कार्य को सर्वसम्मति एवं शांतिपूर्वक संपन्न होने की बेला अब समीप आ गयी है ।भगवान राम और उनके पार्षद उच्च कोटि के बाबाजी जैसे संतों के द्वारा कार्यों का संचालन गुप्त रूप से संचालित होता रहता है पर नेतागढ़ श्रेय की लड़ाई में व्यस्त रहते हैं ।

2000 और 2018 के बीच कई बार श्री मोहन भागवत और श्री अशोक सिंघल इत्यादि बाबाजी का आशीर्वाद लेने के लिए विंध्याचल , पटना , वृन्दाबन , प्रयाग , उज्जैन इत्यादि स्थानों पर आये । हर बार राम मंदिर निर्माण की चर्चा हुई । हर बार बाबाजी ने उन्हें बताया कि रामलला तो स्थान पर बैठे ही हैं और उनकी पूजा अर्चना चल ही रही है , मंदिर अभी भी कार्य कर रहा है । केवल एक विशाल मंदिर भवन का निर्माण होना है । एक बार अशोक सिंघल ने बाबाजी को बताया कि देवराहा बाबा ने विंध्याचल में इसी स्थान पर उन्हें आश्वस्त किया था कि भगवान राम का भव्य मंदिर कानून के द्वारा निर्माणित होगा पर बाबाजी चले गए और मंदिर अभी तक नहीं बना और यह कि क्या उनके जीवनकाल में यह हो पायेगा । बाबाजी ने हर बार इन को आश्वस्त किया कि जो कुछ भी देवराहा बाबाजी ने बताया है वो पूर्ण सत्य है और मंदिर कानून के द्वारा सर्वसम्मति से और शांतिपूर्वक बनेगा । हंस बाबाजी ने उन्हें बताया कि देवराहा बाबाजी ने राम मंदिर के बनने की निश्चितता एवं उसकी विधि ( सर्वसम्मति , शांतिपूर्वक एवंम कानून के द्वारा ) के बारे में जो कुछ भी बताया बह पूर्ण सत्य है पर बाबाजी ने इसकी तिथि के बारे में नही बताया था । बाबाजी ने उनको बताया कि ” वृथा न जाये संत की वाणी “और यह कि यह पूर्ण सत्य है ।
19 नवंबर 2013 को श्री अशोक सिंघल 2014 में बीजेपी एवं मोदी जी की जीत का बाबाजी से आशीर्वाद लेने विंध्याचल आये । अशोक सिंघल जी ने बाबाजी से कहा कि बीजेपी को कानून द्वारा मंदिर निर्माण के लिए लोकसभा में कम से कम 300 सीटों पर विजयी हो कर आना होगा । इसके लिए उन्होंने बाबाजी ने कई बार बीजेपी को आशीर्वाद के लिए प्रार्थना की । बाबाजी ने अनेकों संकेत देकर यह जना दिया कि ऐसा ही होगा । क्योंकि हम लोगों को योगियों की सांकेतिक भाषा समझने का थोड़ा बहुत अनुभव है मैंने बाद में सिंघल जी को 2014 में बाबाजी के आशीर्वाद द्वारा विजयी होने की अग्रिम बधाई उसी दिन दे दी ।इसके बाद मई 2014 में परिणाम घोषित होने से पहिले बाबाजी ने अपने पटना मंच से कई श्वेत चादरों पर कई कमल आध्यात्मिक रूप से अंकित करके अपने शिष्यों को दिखाये । बीजेपी की ऐतिहासिक विजय होने के पश्चात बाबाजी ने मुझे 108 गठरी मखाने का प्रसाद श्री मोहन भागवत के पास देने के लिए निर्देशित किया । इन गठरियों की चादरों में कमल का चिन्ह आध्यात्मिक रूप से अंकित था । यह प्रसाद श्री भागवत जी को मैंने उनके दिल्ली स्तिथ झंडेवालान कार्यालय में दिया और कमल के चादरों में अंकित होने के बारे में बताया । श्री मोहन भागवत ने अपने सहायकों को मखाना प्रसाद वितरण करने के बाद कमल से अंकित चादरों को उनके नागपुर कार्यालय की उनकी अलमारी में सुरक्षित रखने के लिए निर्देशित किया ।
बीजेपी की 2014 की विजय के बाद श्री अशोक सिंघल दो बार बाबाजी के दर्शन में विंध्याचल आये । पहली बार बाबाजी ने उनसे राम मंदिर के प्रस्ताव को मूर्त रूप देने के बारे में क़ानून बनाने के बारे में प्रगति को जानने के लिए पूछा । श्री सिंघल ने बताया कि अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उसकी प्रतीक्षा करनी होगी । मैं भी वहाँ उपस्थित था । मैंने उनसे कहा कि पार्लियामेंट इस कोर्ट केस के बाबजूद कानून बना सकता है और संविधान ने कानून बनाने की जिम्मेदारी केवल पार्लियामेंट को सौंपी है । फिर उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सभा में उन का बहुमत न होने के कारण इस में समय लगेगा । मैंने उनसे कहा कि अगर कानून बनाना ही है और सारी ग़ैर बीजेपी पार्टियां इस का विरोध करती है तो बीजेपी सरकार दोनों सभाओं का सम्मिलित सेशन बुला कर कानून बना सकते हैं । उन्होंने बाबाजी को बताया कि अभी सरकार इस विषय पर तुरंत क़ानून न बनाकर कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा करना चाहती है । मैंने उनसे अलग से बात करी तो उन्होंने बताया कि हम लोग अगर अधिक दवाब डालते हैं तो सरकार सोचती है कि विहिप सरकार को सुचारू रूप से नहीं चलने देना चाहती है । इसलिए विहीप का विचार है कि कुछ समय प्रतीक्षा करें और कोर्ट का आदेश आने बाद आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा । 2015 में जब श्री सिंघल बहुत बीमार हो कर मेदांता अस्पताल गुरुग्राम में भर्ती हुए थे उन्होंने अपने एक हॉलैंड के यूरोपियन मित्र को बताया था कि मैं भारत के राजनैतिक तंत्र से थोड़ा निराश हुआ हूँ और सभी राजनीतिक दलों एवं न्यायपालिका का धर्म और आस्था के मामलोँ में अधिक विश्वास न कर के भगवान राम से पूर्णरूपेण जुड़े सिद्ध महायोगियों एवं भविष्यदृष्टा जैसे ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबा के निर्देशों का पालन करना चाहिए । ऐसा उनके यूरोपियन मित्र ने मुझे विंध्याचल आश्रम में अपने विजिट के दौरान 2017 में बताया था । बाबाजी ने फिर श्री सिंघल से कहा था कि अगर दूसरे विषयों में देरी होती है तब तुम गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने के लिए कार्य करो । श्री सिंघल ने कहा कि यह बहुत विषम विषय है क्योंकि इससे लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है और लाखों करोड़ रुपयों की राष्ट्र को आय होती है । बाबाजी ने उनको बताया कि गौहत्या बंद होने से राष्ट्रीय आय सैकङो गुना बढ़ेगी और घटने का कोई प्रश्न ही नहीं है । फिर श्री सिंघल ने कहा कि हम लोग श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने के लिए विचार कर रहें हैं । बाबाजी ने कहा कि गीता तो पहिले से ही अंतर्राष्ट्रीय ग्रंथ है । हम लोगों ने इस से यह अनुभव किया कि बीजेपी सरकार काफी सावधानी से इन विषयों पर कार्य करना चाहती है और शायद यह सही भी था । बाबाजी ने हम लोगों को बताया कि इस समय आतंकबाद को समाप्त करना एवं सीमाओं की रक्षा करना सबसे आवश्यक कार्य है और राम मंदिर पर कुछ समय प्रतीक्षा की जा सकती है और कोर्ट का आदेश आने के बाद सरकार इस पर उचित निर्णय ले सकती है । बाबाजी हमेशा ही बताते आये हैं कि भगवान राम का मंदिर बनने की तिथि का निर्धारण तो भगवान राम स्वयं करेंगे पर इस का कानून के द्वारा निर्माण होना निश्चित है । इन साढ़े चार वर्षों में एक तरह से सर्वसम्मति बन चुकी है और मुस्लिम समुदाय के अधिकतर लोग अब इस स्थान पर केवल मंदिर बनाने के पक्ष में है । और कुछ लोगों को छोड़ कर कोई विशेष विरोध नहीं होगा । अब न्यायपालिका के रुख से यह लगभग स्पष्ट हो चुका है कि सर्वोच्च न्यायालय इस आस्था एवं आध्यात्मिक विषय के ऊपर शीघ्र निर्णय लेने में पूर्णतया सक्षम महसूस नहीं करते और उनके द्वारा निर्णय लेने में बहुत देर हो सकती है और उसके बाद भी संसद को कानून बनाना ही पड़ सकता है क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुप्रीम कोर्ट इस विषय को केवल title suit मानकर चल रहा है । बाबाजी ने इन लोगों को हमेशा यह बताया है कि इस स्थल पर राम मंदिर त्रेता युग से लाखों सालों से कार्य कर रहा है जबकि विवादित ढांचा केवल 500 वर्ष पुराना होगा । राम जन्मभूमि स्थल जो कि लाखों वर्षों से भगवान राम की रही है , वोह आज भी और कल भी उन्ही की रहेगी । विवादित ढांचे के नीचे मंदिर होने के सैकङो साक्ष्य मिलने के उपरांत यह भौतिक जगत की दृष्टि से भी सिद्ध हो चुका है । आध्यात्मिक दृष्टि से तो यहां लाखों वर्षों से रामलला का मंदिर विराजमान है ।
अब बाबाजी का यह मानना है कि अब सरकार बगैर देरी किये संसद में इस पर कानून बनाकर भव्य मंदिर बनाने का मार्ग तुरंत प्रशस्त करें । यह देशहित एवं विश्वशान्ति के लिए परम आवश्यक है । इस विषय पर संसद में कानून बनाकर भगवान राम के मंदिर को तुरंत बनवाने का निर्णय सम्पूर्ण भारतवर्ष एवं समस्त भारतीयों के हित में होगा और यह विश्वशांति के लिए आवश्यक है ।
लगभग एक सप्ताह पहिले आपके काशी प्रवास के दौरान मैंने आपको बाबाजी का प्रसाद देते हुए आपको उनका संदेश दिया था की राम मंदिर का कानून के द्वारा शीघ्र निर्माण आपके ,आपकी सारी संस्थाओं , देश एवं विश्व के लिए कल्याणकारी होगा । 21 /11 / 2018 की शाम को जब आप बाबाजी के पटना स्तिथ आश्रम में उनके दर्शन में आये थे तो बाबाजी ने आपको स्मरण कराया था कि आपके एवं श्री अशोक सिंघल जी के 7/12 /2007 , 4/ 10 /2010 ,5/ 12 /2010 , 15/ 06 2013 , 19/ 11 /2013 और जन्माष्टमी 2014 को बाबाजी के आश्रमों में विज़िट के दौरान हर बार राम मंदिर के बारे में सर्वसम्मति, शांतिपूर्वक एवं क़ानून के द्वारा निर्माण होने की निश्चितता की भविष्यवाणी को पिछले 11 सालों में दोहराया था। यही बात परमपूजनीय ब्रह्मऋषि श्री देवराहा बाबाजी कई दशकों से बताते रहे थे । आपके 21 नवंबर के विजिट के दौरान बाबाजी ने आपको स्पष्ट बताया कि राम मंदिर के कानून के द्वारा निर्माण करने की शुभ बेला अब आ गयी है । बाबाजी ने यह भी स्पष्ट रूप से आपको बताया कि राम मंदिर का निर्माण , सनातन धर्म के उत्थान , भारत राष्ट्र के उत्थान और उसको विश्वव्यापी एवं आध्यात्मिक विश्वगुरु बनाने के लिए आवश्यक है और इसकी भी घड़ी अब आ चली है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य भी सनातन धर्म का उत्थान ,राष्ट्र निर्माण एवं अखंड भारत को उदय होते हुए विश्व शांति की स्थापना करना है । इसके लिए अब संघ परिवार को तुरंत राम मंदिर को कानून के द्वारा निर्माण करवाना होगा । बाबाजी अपनी दिव्य दृष्टि से ना केवल देश बल्कि विश्व के भविष्य को देखते हुए सही समय पर सही कार्य करने का उपदेश विश्वशान्ति और मानव समाज के कल्याण के लिए करते हैं । यहां यह बताना आवश्यक होगा कि भविष्य को देखकर सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण हेतु निर्देश करने की क्षमता केवल बाबाजी जैसे त्रिकालदर्शी महायोगियों में ही होती है और राजनेताओं को इसीलिये उनके आदेशों का पालन करना परम कल्याणकारी होता है ।
संलग्न 1 डीवीडी बाबाजी दिशानिर्देश राम मंदिर पर (2000- 2018 )
भाग 1,2 एवं 3
2 बाबाजी की रामजन्मभूमि विषयक परावाणी
3 बाबाजी की राममंदिर परावाणी का अंग्रेजी अनुवाद

आपका शुभेक्षु ,

अतुल कुमार सक्सेना ,
शिष्य ब्रह्मवेत्ता श्री देवराहा हंस बाबाजी

प्रतिलिपि
1 श्री नरेन्द्र मोदी , प्रधानमंत्री
2 समस्त कैबिनेट मंत्री केंद्रीय सरकार
3 योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश
4 समस्त मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार
5 श्री अमित शाह अध्यक्ष बीजेपी
6 अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद
7 श्री उद्धव ठाकरे अध्यक्ष शिव सेना
8 श्री राहुल गांधी अध्यक्ष भारतीय कांग्रेस पार्टी
9 श्री प्रवीण तोगड़िया अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद
10 श्री सलमान खुर्शीद
11 श्री बूटासिंह

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